रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग । आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने नगर निगम, नगर परिषद् और नगर पंचायत के मेयर पद के लिए आरक्षण निर्धारित कर दिया है। इसके तहत हजारीबाग नगर निगम चुनाव में एक बार फिर अनुसूचित जनजाति को आरक्षण मिल गया। इस बार हजारीबाग नगर निगम चुनाव में अनुसूचित जनजाति के महिला और पुरुष दोनों चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमाएंगे। झारखंड सरकार के इस फैसले ने एक बार फिर जिले के लगभग 95 प्रतिशत ओबीसी और सामान्य वर्ग को निराश करते हुए हैरत में डाल दिया है। जिसपर नगर में लोगों का विरोध सामने आने लगा है।
सदर विधायक प्रतिनिधि सह बाल विकास विभाग एवं जिला कार्य समिति सदस्य अनुलाल ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नगर निगम चुनाव में ओबीसी और सामान्य वर्ग को आरक्षण न मिलना समझ से परे है। यह फैसला हेमंत सरकार के ओछी राजनीति को दर्शाता है। राज्य सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करे अन्यथा भारी जन अक्रोश का सामना करना पड़ेगा। बड़ी बाजार निवासी भाजपा कार्यकर्ता और समाजसेवी कृष्णा गुप्ता ने कहा कि आरक्षण जनसंख्या के आधार पर मिलना चाहिए। जिले में अनुसूचित जाति और जनजाति की संख्या लगभग 5 प्रतिशत है, फिर बार बार एसटी एससी को ही आरक्षण क्यों? हेमन्त सरकार को इसपर पुनर्विचार करना चाहिए।
बडा अखाड़ा निवासी भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य प्रियम्बदा ने कहा कि हेमन्त सरकार आरक्षण के मुद्दे पर जो कहते हैं वो करते नहीं। उनका नजरिया किस दिशा में जा रहा है, वह समझ से परे है। मेरे विचार से सभी को मौका मिलना चाहिए। वैश्य महासभा के ज़िला अध्यक्ष सुनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि ओबीसी को आरक्षण मिलने से नगर में विकास को बढ़ावा मिलेगा। एसटी एससी में जानकारी का अभाव है। उनमें बेहतर कार्यकुशलता भी नहीं दिखती।
