निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा । जिले के नारायणपुर प्रखंड कार्यालय परिसर में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से निर्माणाधीन भवन की छत की सेंटरिंग ढलाई के दौरान अचानक भरभराकर नीचे गिर गई। घटना के समय मौके पर काम चल रहा था, हालांकि गनीमत रही कि इसमें किसी के घायल होने या जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं है। घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और संवेदक की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रखंड कार्यालय परिसर में पूर्व से निर्मित पानी टंकी के समीप पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की ओर से एक भवन का निर्माण कराया जा रहा है। भवन की छत की ढलाई का कार्य शुरू होना था। इसी दौरान सेंटरिंग का बड़ा हिस्सा अचानक खुल गया और पूरी संरचना भरभराकर नीचे गिर गई। बताया जा रहा है कि छत की करीब 80 प्रतिशत ढलाई का कार्य पूरा हो चुका था, जिसके बाद सेंटरिंग के कमजोर पड़ने से यह हादसा हुआ।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मामले की जांच की मांग की है।
नारायणपुर प्रखंड एवं नारायणपुर पंचायत के पंचायत समिति सदस्य पवन पोद्दार ने निर्माण कार्य में संवेदक और मिस्त्री पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग थी कि पानी टंकी से नियमित पेयजल आपूर्ति हो और लोगों को इसका लाभ मिले। ऐसे में निर्माण कार्य के दौरान इस तरह सेंटरिंग का गिरना गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया तो पूरी योजना प्रभावित हो सकती है। उन्होंने जामताड़ा जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की।
वहीं, मामले को लेकर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता संतोष महतो ने बताया कि छत की ढलाई का कार्य दो दिनों में पूरा किया जाना था। करीब 150×60 के क्षेत्र में ढलाई होनी थी, लेकिन कार्य की शुरुआत में ही सेंटरिंग खुलकर नीचे गिर गई। घटना के बाद निर्माण कार्य की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है।
घटना के बाद अब सवाल उठ रहा है कि निर्माण कार्य में सेंटरिंग और अन्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर की गई थी। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
