निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । चित्तरंजन यात्रियों की सुरक्षा को लेकर रेलवे की गंभीर लापरवाही का मामला चित्तरंजन रेलवे स्टेशन पर सामने आया है। प्लेटफॉर्म संख्या-2 और 3 के बीच पैदल ऊपरी पुल (एफओबी) के पास स्थित यात्री शेड में लगी एक स्टील चेयर पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित अवस्था में पाई गई। चेयर के सभी 12 नट-बोल्ट गायब थे, जिससे वह किसी भी समय दुर्घटना का कारण बन सकती थी।
गुरुवार सुबह यह मामला तब उजागर हुआ, जब दुमका-रांची इंटरसिटी एक्सप्रेस पकड़ने पहुंचे एक यात्री ने प्रतीक्षा के दौरान उक्त चेयर पर बैठने का प्रयास किया। बैठते ही कुर्सी अचानक पीछे की ओर झुक गई और पलटने लगी। हालांकि यात्री ने समय रहते खुद को संभाल लिया, जिससे बड़ा हादसा टल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यदि उस समय कोई बुजुर्ग, महिला या बच्चा कुर्सी पर बैठा होता तो उसे गंभीर चोट लग सकती थी। घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद यात्रियों में रेलवे प्रशासन के प्रति नाराजगी देखने को मिली।
नियमित जांच नहीं होने का आरोप
स्थानीय लोगों और यात्रियों ने आरोप लगाया कि स्टेशन परिसर में यात्रियों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की नियमित जांच और रखरखाव नहीं किया जा रहा है। इसी लापरवाही के कारण स्टेशन पर ऐसी खतरनाक स्थिति उत्पन्न हुई है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
यात्रियों ने मांग की है कि केवल संबंधित कुर्सी की मरम्मत कर औपचारिकता पूरी न की जाए, बल्कि पूरे स्टेशन परिसर में लगी सभी कुर्सियों, यात्री शेडों और अन्य सुविधाओं का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
क्या बोले स्टेशन प्रबंधक
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए चित्तरंजन स्टेशन प्रबंधक अशोक शर्मा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित विभाग को तत्काल मरम्मत के निर्देश दे दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि खराब कुर्सी को जल्द दुरुस्त कर यात्रियों के उपयोग के लिए सुरक्षित बनाया जाएगा।
रखरखाव व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने रेलवे स्टेशन पर रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। यात्रियों का कहना है कि रेलवे को केवल ट्रेनों के संचालन पर ही नहीं, बल्कि स्टेशन पर उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर भी समान रूप से ध्यान देना चाहिए, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिल सके।

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