निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा । सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर कथित फर्जीवाड़े का एक मामला जामताड़ा समाहरणालय में सामने आया है। क्लर्क पद पर योगदान देने पहुंचे एक युवक की नियुक्ति प्रक्रिया उस समय संदेह के घेरे में आ गई, जब अधिकारियों ने उसके दस्तावेजों की जांच की। जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद पुलिस ने युवक और उसके ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गिरिडीह जिले के देवरी गांव निवासी रजाक अंसारी अपने ससुर अख्तर अंसारी के साथ जामताड़ा समाहरणालय पहुंचा था। उसने दावा किया कि उसे क्लर्क पद पर नियुक्ति मिली है और वह योगदान देने आया है। नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच के दौरान अधिकारियों को कई संदिग्ध तथ्य मिले, जिसके बाद पूरे मामले की गहन जांच की गई।
जांच में सामने आया कि युवक द्वारा प्रस्तुत जॉइनिंग लेटर पर उपायुक्त के कथित हस्ताक्षर और कार्यालय की मुहर संदिग्ध प्रतीत हो रही थी। दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान अधिकारियों ने पाया कि हस्ताक्षर और मुहर असली नहीं हैं। इसके अलावा आधार कार्ड, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य अभिलेखों में भी कई विसंगतियां पाई गईं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका और गहरा गई।
दस्तावेजों की सत्यता पर संदेह होने के बाद समाहरणालय प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही जामताड़ा थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और रजाक अंसारी तथा उसके ससुर अख्तर अंसारी को हिरासत में लेकर थाना ले गई। दोनों से मामले को लेकर पूछताछ की जा रही है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों के फर्जी होने के संकेत मिले हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि कथित नियुक्ति पत्र किसने तैयार किया और इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि सरकारी नौकरी दिलाने ।
