निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार और विभागीय अधिकारियों के बड़े-बड़े दावों के बीच जामताड़ा जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में एक गंभीर मरीज को समय पर एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल सकी, जिसके कारण परिजनों को ट्रैक्टर पर खटिया रखकर उसे अस्पताल पहुंचाना पड़ा। अस्पताल में इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई।
मामला जामताड़ा प्रखंड की गोपालपुर पंचायत अंतर्गत शहरबेड़ा गांव का है। जानकारी के अनुसार गांव निवासी मोनू टुडू की शुक्रवार शाम अचानक तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन आरोप है कि कई बार फोन करने के बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची।
मरीज की हालत लगातार गंभीर होती देख परिजनों और ग्रामीणों ने खुद ही उसे अस्पताल पहुंचाने का निर्णय लिया। गांव में उपलब्ध ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया रखकर मोनू टुडू को जामताड़ा सदर अस्पताल ले जाया गया। हालांकि अस्पताल पहुंचने तक काफी देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो संभवतः मरीज की जान बचाई जा सकती थी। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया।
यह घटना केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है, बल्कि जिले की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को भी सामने लाती है। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और डिजिटल हेल्थ सिस्टम के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को आज भी ट्रैक्टर और निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने जिले में एंबुलेंस की कमी स्वीकार की। उन्होंने बताया कि जिले में पहले 13 एंबुलेंस संचालित थीं, लेकिन वर्तमान में 8 एंबुलेंस लंबे समय से खराब पड़ी हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और संबंधित एजेंसी को कई बार जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
मोनू टुडू की मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी एंबुलेंस व्यवस्था ही चरमराई हुई है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा कैसे मिलेगी? अब लोगों की निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं कि इस घटना के बाद व्यवस्था में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं

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