निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा । झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और डिजिटल हेल्थकेयर को आम लोगों तक पहुँचाने में अहम योगदान देने वाले जामताड़ा के प्रसिद्ध सर्जन डॉ. दुर्गेश झा को राज्य सरकार ने विशेष सम्मान दिया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफ़ान अंसारी ने उन्हें ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा में उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया। यह सम्मान रांची में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन कार्यक्रम के तहत आयोजित राज्य स्तरीय कार्यशाला के दौरान आईपीएच ऑडिटोरियम, एनएचएम कैंपस में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। इस अवसर पर मंत्री ने डॉ. झा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
इस तरह कुल मिलाकर डॉ. झा ने 1,34,000 से अधिक मरीजों को ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म के माध्यम से चिकित्सा सहायता प्रदान की है, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
डॉ. झा ने कई ऐसे गंभीर मरीजों को समय रहते सही सलाह दी, जिससे उन्हें उचित अस्पताल या चिकित्सा केंद्र तक पहुँचाया जा सका। कई मरीज ऐसे थे जो दूरी, आर्थिक परेशानी या संसाधनों की कमी के कारण समय पर इलाज नहीं करा पाते थे। ई-संजीवनी सेवा के जरिए उन्हें राहत मिली। उनकी भूमिका खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
डॉ. दुर्गेश झा ने सिर्फ इलाज ही नहीं किया, बल्कि लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया। उन्होंने ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को बीमारी के लक्षण, सही समय पर जांच और जरूरी सावधानियों के बारे में जानकारी दी। उनका व्यवहार, सटीक निदान और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता लोगों के बीच विश्वास का कारण बना है।
डॉ. झा को मिला यह राज्य स्तरीय सम्मान केवल उनकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह झारखंड के अन्य डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों और मेडिकल छात्रों के लिए भी प्रेरणा है। इससे यह संदेश गया है कि डिजिटल माध्यम से भी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा सकता है।
इस सम्मान के बाद जिले और राज्य भर में लोगों ने खुशी जाहिर की। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने डॉ. दुर्गेश झा की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे डॉक्टर ही स्वास्थ्य सेवाओं की असली रीढ़ हैं।
यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि झारखंड अब आधुनिक और तकनीक आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ई-संजीवनी जैसी सेवाएं राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुलभ बना रही हैं।
