विश्वजीत चटर्जी

सीआईएसएफ और अधिकारी बैरंग लौटे, हिंसक टकराव टला

जोरापोखर। बीसीसीएल की परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए शुक्रवार को सीआईएसएफ द्वारा भूलन बरारी कोलियरी की लक्ष्मी कॉलोनी के पास रैयती जमीन पर चेकपोस्ट बनाने के प्रयास को ग्रामीणों ने रोक दिया। लगभग पांचसौ ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद सीआईएसएफ की टीम और परियोजना अधिकारी बैरंग वापस लौट गए। मौके पर पुलिस की तैनाती से बड़ा टकराव टल गया।

बताते चलें कि बीसीसीएल परिसंपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सीआईएसएफ के लगभग तीन दर्जन जवान परियोजना पदाधिकारी अनिल कुमार के साथ लक्ष्मी कॉलोनी के समीप टेन सीम रेलवे लाइन के पास चेकपोस्ट के लिए गुमटी रखने पहुंचे थे। इसी दौरान लक्ष्मी कॉलोनी, मोदीभिट्ठा, जोगनकोचा, पारवाद, पहाड़ीगोड़ा आदि क्षेत्रों के ग्रामीण गोलबद्ध होकर मौके पर पहुंच गए और निर्माण कार्य का विरोध शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का कहना था कि यह जमीन रैयती है और इस पर बीसीसीएल का कोई अधिकार नहीं है। विरोध बढ़ने पर सीआईएसएफ और ग्रामीणों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।

ग्रामीणों ने सीआईएसएफ निरीक्षक संजीव सिंह से कहा कि अगर यह जगह बीसीसीएल की है तो जमीन के कागज दिखाए जाएं। बीसीसीएल अधिकारियों द्वारा कागज प्रस्तुत नहीं किए जाने पर करीब 2 घंटे बाद सीआईएसएफ की टीम मौके की नजाकत को देखते हुए वापस लौट गई।

सूचना पर विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए जोरापोखर थाना और अलकडीहा ओपी की पुलिस भी मौके पर तैनात थी।

ग्रामीणों का आरोप है कि दो दशक पहले भूलन बरारी क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ जमीन को प्रबंधन द्वारा अधिग्रहित कर कोयला खनन किया गया था। कुछ लोगों को नियोजन और मुआवजा दिया गया, लेकिन अधिकांश रैयतों को आज तक कुछ नहीं मिला।

प्रदर्शनकारियों ने कहा, जब तक जबरन अधिग्रहित जमीन के बदले नियोजन और मुआवजा का भुगतान नहीं होगा, तब तक अपनी जमीन पर कोई सरकारी काम नहीं होने देंगे।

सीआईएसएफ निरीक्षक संजीव सिंह ने कहा, ग्रामीणों ने कार्यस्थल को रैयती जमीन बताकर निर्माण रुकवा दिया है। बीसीसीएल प्रबंधन और रैयतों द्वारा न्यायालय में जमीन के कागज प्रस्तुत करने के बाद मालिकाना हक स्पष्ट होने पर ही यहां चेकपोस्ट और गुमटी लगाई जाएगी।

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