हजारीबाग के खैरा गांव में चला सात घंटे का बचाव अभियान — जेसीबी और ग्रामीणों की मदद से वन विभाग ने किया चमत्कारिक रेस्क्यू, खुश होकर जंगल लौटे हाथियों का झुंड
रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग: जिले के टाटीझरिया थाना क्षेत्र के खैरा गांव में मंगलवार की रात मानवता और प्रकृति के बीच संवेदना का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। चार जंगली हाथियों का झुंड जब गांव के पास पहुंचा, तो अचानक एक हथिनी का बच्चा गांव के किनारे बने पुराने कुएं में गिर गया।
घटना की जानकारी मिलते ही पूरे गांव में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग को सूचना दी। मौके पर वनपाल विद्याभूषण प्रसाद, राजकुमार सिंह और शंभू प्रसाद के नेतृत्व में टीम पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
रात के अंधेरे में मशालों की रोशनी और जेसीबी मशीन की मदद से करीब सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस दौरान हथिनी और उसके साथ आए हाथियों का झुंड लगातार कुएं के आसपास मंडराता रहा, मानो अपने बच्चे की सलामती की प्रार्थना कर रहा हो।
कुएं का एक हिस्सा तोड़कर रास्ता बनाया गया और जब नन्हा हथिनी का बच्चा सुरक्षित बाहर आया, तो वहां मौजूद सभी ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बच्चे के निकलते ही हाथियों के झुंड ने ज़ोरदार आवाज़ में खुश होकर अपनी प्रतिक्रिया दी और धीरे-धीरे जंगल की ओर लौट गए।
यह घटना न केवल वन विभाग और ग्रामीणों की सतर्कता का उदाहरण बनी, बल्कि इसने यह भी साबित किया कि इंसान और जानवर के बीच संवेदना की डोर आज भी जीवित है।
अभियान में शामिल थे: वनपाल विद्याभूषण प्रसाद, राजकुमार सिंह, शंभू प्रसाद, और खैरा गांव के सैकड़ों ग्रामीण।
लोगों ने कहा : “ये सिर्फ एक रेस्क्यू नहीं, बल्कि करुणा और एकजुटता की मिसाल थी।”
रातभर जलती मशालों, जेसीबी की गड़गड़ाहट और सैकड़ों लोगों की भीड़ के बीच यह सात घंटे का संघर्ष, अंततः “ज़िंदगी की जीत” के रूप में समाप्त हुआ।
