रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग/कटकमसांडी । जिले के कटकमसांडी प्रखंड क्षेत्र का प्रसिद्ध छड़वा डैम, जिसका निर्माण दामोदर घाटी निगम (डीवीसी) के अधीन वर्ष 1952 में किया गया था, इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। डैम का एक फाटक टूट जाने से जलस्तर तेजी से घटने की आशंका बनी हुई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अब डैम में महज 19 से 20 फीट पानी ही शेष रहेगा, जबकि इसकी कुल क्षमता 34 फीट है।स्थानीय कंचनपुर पंचायत के ग्रामीणों ने जानकारी दी कि डैम पर पुल बनने के बाद लोहे का गेट लगाया गया था, लेकिन पिछले कई दशकों से गेट का कभी मरम्मत नहीं हुआ। नतीजतन आज स्थिति यह है कि जर्जर फाटक टूट चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते इसकी मरम्मत कर दी जाती तो आज यह संकट नहीं खड़ा होता।डैम का क्षेत्रफल और प्रबंधन निर्माण के समय छड़वा डैम का क्षेत्रफल लगभग 1500 एकड़ में फैला हुआ था, किंतु अब यह घटकर 1400 एकड़ तक सीमित हो गया है। डैम का लीज नगर निगम के पास है, वहीं शहर में जलापूर्ति का कार्य जल संरक्षण विभाग, हजारीबाग द्वारा संचालित किया जाता है।
शहर में पेयजल आपूर्ति पर असर फाटक टूटने से सबसे बड़ी समस्या शहरवासियों की पेयजल आपूर्ति पर खड़ी हो गई है। यदि पानी का स्तर और घटता है तो आने वाले दिनों में हजारीबाग शहर के हजारों लोगों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।प्रशासन की सक्रियता घटना की जानकारी मिलते ही जिले के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और टूटी फाटक की स्थिति का जायजा लिया। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है तथा तकनीकी टीम को बुलाकर मरम्मत की संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है।
स्थानीय लोगों की मांग,,,,,
स्थानीय ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि छड़वा डैम की तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही डैम की संरचना को सुरक्षित रखने के लिए समय-समय पर तकनीकी निरीक्षण व रखरखाव की व्यवस्था की जाए।
