निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा । जैन धर्मावलंबियों का आज महापर्व पर्यूषण का पांचवां दिन है। महापर्व पर्यूषण 20 अगस्त से शुरू हुई है। जिले के नाला विधानसभा क्षेत्र के सालकुंडा गाँव में महावीर भगवान जो कि जैन धर्म के 24वे तीर्थंकर हैं उनका आज जन्म वाचन के अवसर पर धार्मिक और सामाजिक उत्सव का आयोजन किया गया। भगवान महावीर का जन्म संयुक्त बिहार के कुंडलग्राम में हुआ था जैन समुदाय के लिए बहुत सौभाग्य का बात है कि भगवान महावीर इस राज्य में विचरण किए थे। इसलिए गाँव के लोगों ने महावीर जन्म वाचन को धूमधाम से मनाया और इस अवसर पर धर्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। सालकुंडा जैन मंदिर अत्यंत प्राचीन मंदिर है। लेकिन सरकार की और से कोई भी सहायता समुदाय को नहीं मिल पा रहा है। यहां आने के मुख्य सड़क भी नहीं बना है यहां के पुलिया भी टूटा है।
इस उत्सव में गाँव के लोगों ने महावीर जन्मवाचन के अवसर पर महिला और बच्चो के साथ मिलकर पूजा-अर्चना की और धार्मिक गाने गाए। साथ ही, गाँव के बच्चो ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया और भजन संध्या का आयोजन किया।
इस अवसर पर गाँव के राजेंद्र सराक ने बताया कि महावीर का एक ही वाणी था जियो और जीने दो इसलिए खुद भी अहिंसा से जियो और दूसरो को भी शांति पूर्वक जीने दो जिससे राज्य में शांति बनी रहेगी और महावीर वाचन के बारे में बताया। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी (चैत्र शुक्ल-१३) के दिन मध्यरात्रि के समय में श्री क्षत्रियकुंड नगर के मौसम में कभी भी नहीं हुआ हों वैसा कुदरती वातावरण का सर्जन हों रहा था।।दशों दिशाओं में चारों ओर से धूल के रजकणों से शांत हो जाने से बहुत ज्यादा मनोभावन लग रही थी। शुक्ल पक्ष में पूर्णिमा के आसपास का दिन होने से चांदनी की रोशनी फेल जाने से आह्लादक प्रकाश देदीप्यमान लग रहा था। दिशा में दाह उत्पन्न होने जैसी कोई भी प्रकार का उपद्रव भी नहीं हो रहा था। कौआ-घुवड-कोयल आदि पक्षियों भी जय-जयकार कर रहे थे। वायु भी प्रदक्षिणा दें रहा हों वैसे बहता होने से सभी को बहुत अच्छा महसूस हो रहा था। वायु पुष्पों आदि से सुगंधित एवं शीतल होने सभी को सुख दें रहा था। आनंददायक बन रहा था। चारों । सभी क्षत्रियकुंड वासी नगर जनों चारों ओर सुकाल आदि होने से बहुत ज्यादा आनंदित थे। नगर जनों अपने-अपने परिवार-जनों के साथ वसंतोत्सव आदि क्रीड़ा कर रहे थे।।इस तरह के प्रसन्न एवं आनंदमय वातावरण में चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (१३) के शुभ दिन पर मध्यरात्रि के समय में उत्तरा-फाल्गुनी नक्षत्र के साथ चंद्र ग्रह का योग हों रहा था
इस उत्सव में गाँव के सभी वर्गों के लोग उत्साह से भाग लिए और महावीर जन्म वाचन को धूमधाम से मनाया। उत्सव में गाँव की सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने का संकल्प भी लिया गया। Puja में बालिका मंडल और वरुण माजी, तपन माजी, नंदलाल आदि शामिल हुए
