निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । आदिशक्ति मां चंचला के प्रति श्रद्धा और आस्था का महासागर गुरुवार को जामताड़ा में देखने को मिला। जिले की कुल देवी मां चंचला के वार्षिक महोत्सव के पहले दिन निकाली गई कलश शोभा यात्रा में हजारों महिलाओं और युवतियों ने भाग लिया। इस दौरान श्रद्धालुओं की पांच किलोमीटर से भी अधिक लंबी कतारों ने जामताड़ा की सड़कों को भक्तिमय कर दिया। सुबह की सर्दी में भी उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
ठिठुरन भरी ठंड और 8 डिग्री तापमान के बावजूद हजारों महिलाएं और युवतियां अलसुबह से ही शोभा यात्रा में शामिल होने के लिए पहुंचीं। जामताड़ा नगर के अलावे नाला, कुंडहित, फतेहपुर, नारायणपुर, मिहिजाम सहित अन्य गांवों और कस्बों से बस और ऑटो के माध्यम से श्रद्धालु जामताड़ा पहुंचे। चंचला महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल ने बताया कि यह आयोजन न केवल जामताड़ा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि राज्य का सबसे बड़ा धार्मिक कलश यात्रा अनुष्ठान बन चुका है। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में पहले दिन कलश यात्रा निकाली गई। दूसरे दिन विधिवत पूजन,ब्रह्मण भोजन, कन्या पुजन,भजन संध्या किया जाएगा और तीसरे दिन सांस्कृतिक सह भक्ति जागरण कार्यक्रम और पूर्णाहुति के साथ महोत्सव का समापन होगा। सुबह चार बजे से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई, जिससे पूरे शहर की रफ्तार थम गई। आठ घंटे तक मुख्य मार्गों पर यातायात बंद रहा। शोभा यात्रा के दौरान गांधी मैदान, वीर कुंवर सिंह चौक, सुभाष चौक, और रेलवे ओवर ब्रिज समेत मुख्य बाजारों को श्रद्धालुओं की कतारों के लिए सुरक्षित कर दिया गया। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए नगर में कई स्थानों पर मेडिकल टीम एंबुलेंस अन्य आवश्यक सुविधाओं का इंतजाम किया गया था।
कलश यात्रा में शामिल आदिवासी कलाकारों ने ढोल-मृदंग की थाप पर नृत्य कर मां चंचला का अभिनंदन किया। वहीं, बंगाल से आई महिला ढाक टीम और बैंड की धुनों ने आयोजन को और आकर्षक बनाया। रास्ते में श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर उनके उत्साह का स्वागत किया गया।
सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल और एंबुलेंस तैनात की गई। वीर कुंवर सिंह चौक पर एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था की गई, जबकि समिति के वालंटियर्स श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और सेवा में जुटे रहे। कई स्थानों पर पानी और शरबत के स्टॉल लगाए गए। कलश यात्रा के समापन के बाद माता चंचला का प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। तीन दिनों से जारी प्रसाद निर्माण और पैकिंग के बीच करीब 50,000 से ज्यादा लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। मां चंचला की कलश शोभा यात्रा ने जामताड़ा को एक बार फिर भक्तिमय बना दिया और सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए एकता का प्रतीक बनकर उभरी। कलश यात्रा के दौरान नगर के सभी वर्गो एवं समुदाय चढ़कर हिस्सा लिया। शोभा यात्रा के दौरान क्रमबद्ध तरीके से सबसे पहले पांच प्रबुद्ध नागरिक ध्वज लेकर चले उसके बाद डीजे रथ उसके बाद आदिवासी नृत्य ठीक उसके बाद वरिष्ठ नागरिकों का पैदल मार्च ठीक उसके बाद महिला ढाकी दल ठीक उसके बाद भव्य रथ उसके बाद पुरुष ढाकी दल, उसके बाद कलश लेकर मुख्य जजमान ठीक उसके पीछे 21 पंडितों का द्वारा ध्वज लेकर चलना उसके बाद माताएं बहने कलश लेकर चली सबसे पीछे बैंड पार्टी चल रही थी।

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