निशिकान्त मिस्त्री
जामताड़ा । जिले के विभिन्न क्षेत्र में प्रकृति पर्व करमा धूमधाम से मनाया जा रहा है। पूजा उत्सव एवं गीत-संगीत को लेकर पिछले एक सप्ताह से खुशी और उमंग का माहौल बना हुआ है। समाज आदिवासी और मूलवासी समुदायों द्वारा इस पर्व को काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। पिछले मंगलवार से शुरू हुए करमा पर्व एक सप्ताह से करमा नृत्य गीत से गांव में उत्सव का माहौल देखने को मिल रहा है। विभिन्न गांव टोला का संपूर्ण वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। छोटे छोटे बच्चे से लेकर बड़े बुजूर्ग में भी खुशियां भर आई है।
उल्लेखनीय है कि भादो माह के शुक्ल एकादशी तिथि यानी भगवान श्रीकृष्ण के पार्श्व एकादशी के दिन ही करमा पर्व मुख्यरूप से मनाया जाता है। सुबह नहा धोकर नये वस्त्रों में करमा व्रतियों द्वारा दिनभर उपवास रखकर भाई की दीर्घायु व समृद्धि के लिए करमा भगवान की पूजा उपासना की जाती है। उत्सव के प्रथम दिन बांस की डाली (करम डाला) का नदी,तालाब या जलाशय के किनारे पूजा की जाती है तथा उसमे विशुद्ध बालु के ऊपर चना,मूंग,धान, गेहुं आदि नौ तरह के बीज डालकर हर रोज सुबह और शाम विशेषकर व्रत की रात में करम पेड़ की डाली के साथ गांव की बालिका व महिलाओं द्वारा पूजा की जाती है तथा रात भर नृत्य गीत के साथ वे सामुहिक रूप से करम भगवान को याद करते हैं।
कहते हैं कि डाला में रखे गए बीजों का जावा जिस तरह से खिलने लगता है वैसे ही हंसी खुशी व्रतियों के जीवन में भर जाती है।।उपवास के बाद वुधवार की सुबह जलाशय में करमा डाली विसर्जन के साथ पर्व का समापन किया जाएगा।
