निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । होल्डिंग टैक्स में गड़बड़ी कर वर्षों से कम कर जमा करने वाले भवन मालिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ जामताड़ा नगर पंचायत ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। री-असेसमेंट अभियान के तहत अब तक 75 संपत्तियों की रैंडम जांच की गई, जिनमें 50 से अधिक मकानों और दुकानों में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं। प्रारंभिक जांच में नगर पंचायत को 74,413 रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान है।
जांच में सामने आया कि कई संपत्ति मालिकों ने भवन का वास्तविक क्षेत्रफल, अतिरिक्त मंजिल और व्यावसायिक उपयोग छिपाकर कम होल्डिंग टैक्स जमा किया। राज्य सरकार ने कर व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए सेल्फ असेसमेंट (स्वघोषणा) प्रणाली लागू की थी, लेकिन कई लोगों ने इसका दुरुपयोग किया।
नगर विकास विभाग के निर्देश पर टैक्स संग्रहण एजेंसी श्री पब्लिकेशन एंड स्टेशनर्स द्वारा रिकॉर्ड का भौतिक स्थिति से मिलान करने पर बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी का मामला उजागर हुआ। इसके बाद नगर पंचायत ने विशेष सत्यापन अभियान शुरू किया है। अब टीम घर-घर जाकर भवनों का भौतिक सत्यापन करेगी और वास्तविक क्षेत्रफल, मंजिलों की संख्या तथा भवन के उपयोग का रिकॉर्ड से मिलान करेगी।
नगर पंचायत ने चेतावनी दी है कि गड़बड़ी मिलने पर आवासीय भवनों पर 2,000 रुपये और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर 5,000 रुपये का एकमुश्त जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा वास्तविक क्षेत्रफल के आधार पर होल्डिंग टैक्स का पुनर्निर्धारण कर भवन निर्माण की तिथि से अब तक का पूरा बकाया टैक्स पेनाल्टी सहित वसूला जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, स्वघोषणा के बाद संपत्ति मालिकों को 90 दिनों के भीतर सही विवरण नगर पंचायत को देना था, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के बावजूद कई लोगों ने जानकारी अपडेट नहीं कराई। नगर पंचायत ने लोगों से अपील की है कि वे स्वेच्छा से सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि जुर्माने और दंडात्मक कार्रवाई से बच सकें।
जांच में सामने आए टैक्स चोरी के प्रमुख तरीके:
रिकॉर्ड में एक मंजिल दर्ज, जबकि मौके पर दो या तीन मंजिल का निर्माण।
आवासीय दर से टैक्स जमा, लेकिन भवन का व्यावसायिक उपयोग।
अतिरिक्त निर्माण कर क्षेत्रफल बढ़ाया, पर रिकॉर्ड अपडेट नहीं कराया।
आवासीय परिसर में गोदाम या अन्य व्यावसायिक संरचना बनाकर भी आवासीय टैक्स जमा किया।
रिकॉर्ड में खाली प्लॉट दिखाया, जबकि उस पर भवन बन चुका था।
नगर पंचायत ने चालू वित्तीय वर्ष में होल्डिंग टैक्स और ट्रेड लाइसेंस से 1 करोड़ 23 लाख 35 हजार रुपये राजस्व संग्रह का लक्ष्य निर्धारित किया है। अधिकारियों का मानना है कि टैक्स चोरी पर अंकुश लगने से राजस्व बढ़ेगा, नगर निकाय की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और कर व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी।

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