झरिया । बस्ताकोला निवासी उमेश यादव की हत्या गोंदुडीह थाना क्षेत्र के खरीकाबाद में किए जाने के बाद गुस्साए लोगों ने सोमवार को बस्ताकोला में झरिया धनबाद मुख्य मार्ग को तीन घंटे जाम कर दिया।इस दौरान आंदोलन कारियों व पुलिस के बीच दो राउंड नोंकझोंक हुई।अंत में पुलिस ने लाठियां चटका कर जाम हटाने का प्रयास किया।इस दौरान प्रदर्शन कर रहे महिलाएं व पुलिस के साथ हाथापाई भी हो गई। हालांकि किसी तरह वहां मौजूद बुद्धिजीवियों ने मामले को शांत कराया। हालांकि बाद में 7 लाख मुआवजा देने की बात पर सहमति बनी। इसके बाद सड़क जाम हटा।सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद उमेश का शव बस्ताकोला उनके आवास लाया गया। इसके बाद गुस्साए स्थानीय व स्वजनों ने शव को मुख्य मार्ग में रखकर सड़क जाम कर दिया। लोग मृतक के परिवार वालों को 25 लाख मुआवजा व हत्सूयारों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे।सूचना पाकर झरिया इंस्पेक्टर शशिरंजन कुमार दल बल के साथ पहुंचे। इंस्पेक्टर शशिरंजन ने आंदोलन कर रहे लोगों को कहा कि जब हत्या गोंदुडीह ओपी क्षेत्र में हुई है तो यहां सड़क जाम क्यों कर रहे हैं।यह बात सूनते ही लोग भड़कते हुए पुलिस को खरी खोटी सूना दी। स्थिति अनियंत्रित देख धनसार,गोंदुडीह,व बोरागढ़ ओपी पुलिस भी पहुंच गई।इस दौरान पुलिस ने उमेश के मालिक रत्न अग्रवाल से दुरभाष पर बात कहकर मुआवजा देने की बात कही। जहां तीन घंटे के जिच के बाद सात लाख के मुआवजा पर सहमति बनी।
जब भड़के आंदोलन कारी तो पुलिस पड़ी शांत
जब मृतक के परिवार वालों को सात लाख मुआवजा पर सहमति बनने के बाद पुलिस जाम हटाने को कहा।पर स्वजनों का कहना था कि पहले मुआवजा दिजिए इसके बाद ही जाम हटेगा।यह सूनते ही पुलिस आंदोलन कारियों के बीच लाठियां चटकाने लगे।इस दौरान महिलाएं सड़क पर लेट कर इसका विरोध करने लगे। देखते ही देखते महिलाएं व पुलिस में हाथापाई भी हो गई। हालांकि दस मिनट में मुआवजा लाकर देने की बात पर मामला शांत हुआ।
,,,महिलाएं आंदोलन पर बैठी थी। लेकिन झरिया पुलिस इन महिलाओं से निपटने के लिए महिला पुलिस बल नहीं लाई थी। आखिरकार आंदोलनकारी महिलाओं का हाथापाई पुरूष पुलिस से हो ही गई। इससे तो साफ जाहिर है कि पुलिस से महिला बल नहीं लाना एक चुका था।
और नहीं पहुंचे सांसद
तीन घंटे आंदोलन के बाद भी धनबाद सांसद इन आंदोलन कारियों व दुखी परिवार को सुधी लेने नहीं पहुंचे। जिससे स्वजनों व स्थानीय लोगों में आक्रोश है। महिलाओं का कहना है कि उनको फोन पर बुलवाने के बाद दूसरे जगह मिटिंग में होने की बात कहकर कन्नी काट लिया। वहीं मेयर व झरिया विधायक के पैतृक गांव में होने के कारण अफसोस जताया। वहीं आंदोलन के बाद जमसं के नेता अभिषेक पहुंच परिवार वालों की सुधि लेते हुए मुआवजा दिलाने में अपनी भूमिका निभाई।
