मिडिल ईस्ट संकट के बीच महंगाई का झटका लगा है. घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम पूरे 60 रुपये बढ़ गए हैं. वहीं कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये महंगा मिलेगा. नए रेट्स को आज से ही लागू कर दिया गया है. IOC (इंडियन ऑयल) की वेबसाइट पर इसे अपडेट भी कर दिया गया है.

बता दें कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अप्रैल 2025 से नहीं बढ़ाई गई थीं.

अब 14.2kg वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. यानी दिल्ली में 14.2 kg वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है. कोलकाता में कीमत 879 रुपये से बढ़कर 939 रुपये हो गई है, जबकि चेन्नई में यह 868.50 रुपये से बढ़कर 928.50 रुपये हो गई है.

वहीं 19 kg वाले कमर्शियल LPG गैस सिलेंडर की कीमत भी 115 रुपये बढ़ा दी गई है. ये भी 7 मार्च से ही लागू होगी. दिल्ली में 19 kg वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत अब 1883 रुपये और मुंबई में 1835 रुपये होगी.

इसी तरह कोलकाता में कीमत 1875.50 रुपये से बढ़कर 1990 रुपये हो गई है, जबकि चेन्नई में यह 1929 रुपये से बढ़कर 2043.50 रुपये हो गई है. इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कमर्शियल जगहों जैसे बिजनेस पर पड़ेगा.

यह बढ़ोतरी भारत की एनर्जी सप्लाई और फ्यूल की उपलब्धता को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच हुई है. केंद्रीय पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पहले भरोसा दिलाया था कि देश में एनर्जी सप्लाई और फ्यूल की कोई कमी नहीं है और कंज्यूमर्स को सप्लाई में रुकावटों की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

मंत्री ने X पर एक पोस्ट में कहा था, ‘हमारी प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए सस्ता और टिकाऊ फ्यूल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, और हम इसे आराम से कर रहे हैं. भारत में एनर्जी की कोई कमी नहीं है, और हमारे एनर्जी कंज्यूमर्स के लिए चिंता की कोई बात नहीं है.’

इस बीच, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने भी सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को खारिज कर दिया था, जिनमें देश में पेट्रोल और डीजल की कमी का दावा किया गया था. IOC ने ऐसे दावों को बेबुनियाद बताया था.

इससे पहले शुक्रवार को, सरकारी सूत्र ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए रुकावटों की चिंताओं के बावजूद भारत क्रूड ऑयल, पेट्रोलियम प्रोडक्ट और LPG सप्लाई को लेकर ‘बहुत आरामदायक स्थिति’ में है. सूत्र के मुताबिक, देश के पास अभी अलग-अलग सोर्स से ज्यादा एनर्जी सप्लाई है, जो होर्मुज स्ट्रेट के जरिए प्रभावित होने वाली मात्रा से ज्यादा है.

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