निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । झारखण्ड मुक्ति मोर्चा जे संस्थापक, वर्तमान राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन से पूरा झारखण्ड मर्माहत है और दुःख जता रहे हैं। इसी क्रम में जामताड़ा प्रखंड अंतर्गत शिवलीबाड़ी पंचायत में गुरुजी के निधन पर शोक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें पंचायत के मुखिया, वार्ड सदस्य, कर्मी व अन्य गणमान्य ग्रामीण मौजूद थे जहां सभी ने एक मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी, वहीं उनके फोटो पर फूल अर्पित कर उनके आत्मा को शांति मिले इसकी कामना की गई। इस दौरान मुखिया शिवधन हांसदा ने कहा कि शराबबंदी और महाजनी आंदोलन के नायक शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। झारखंड के गांधी समझे जाने वाले दिशोम गुरू के नाम से लोकप्रिय जन नेता शिबू सोरेन का जन्म एकीकृत बिहार के हजारीबाग स्थित नेमरा गांव में 11 जनवरी 1944 को हुआ था। उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त महाजनी प्रथा और शराब के प्रचलन जैसी कुरीतियों से निजात दिलाने को लेकर समाज को जागरूक करने का अभियान शुरू किया। इस प्रथा से त्रस्त लोगों को मुक्त कराने के वास्ते सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में गांव-गांव का भ्रमण किया। इसी क्रम में आजादी के बाद से छोटानागपुर और संताल परगना अब झारखंड की हो रही उपेक्षा से निजात दिलाने के लिए विनोद बिहारी महतो, प्रख्यात मजदूर नेता एके राय और शिबू सोरेन की पहल पर 1972 में झारखंड मुक्ति मोर्चा का गठन कर अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत की। गुरुजी अपने राजनीतिक जीवन में 9 बार लोकसभा सांसद, राज्यसभा संसद, केंद्रीय मंत्री और झारखण्ड के तीन बार मुख्यमंत्री भी रहे हैं। उन्होंने पिछड़े, दलित और आदिवासियों के उत्थान के लिए कई काम किये हैं।

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