निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा । सदर आपताल में डायलिसिस सेंटर शुरू हो जाने से किडनी के मरीजों को जिले में ही सुविधा के साथ ही आर्थिक राहत भी मिल रही है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के संवेदनहीन रवैए के कारण करीब 12 मरीजों को बिना डायलिसिस के ही वापस होना पड़ा। डायलिसिस के मरीजों को दी जा रही दबा और डायलिसिस उपयोग सामग्री के आपूर्ति नहीं होने के कारण हुई। इस बाबत सेवा दाता संजीवनी कांपनी के हेड टेक्नीशियन कोडिनेटर सौरभ ने बताया कि बीते छह माह से दवा एवं अन्य मद में 32 लाख रुपए का भुगतान बार बार सुचित करने के बावजूद आपताल प्रबंधन भुकतान नहीं किया है। वेंडर और क्रेडिट देने से मना कर दिया है वह पूर्व बायाका भुगतान के बाद ही साम्रगी की सप्लाई की बात पर अड़ा है। हालांकि सदर अस्पताल के प्रबंधक इस किसी भी तरह की जानकारी में इंकार करते हैं। बताते चले कि सदर अस्पताल में डालिसिस शुरू होने से खास कर गरीब वर्ग के मरीजों को डायलिसिस कराने के लिए।धनबाद, आसनसोल, दुर्गापुर के प्राइवेट अस्पताल में जाने को विवश है।
जहां सदर अस्पताल में एक बार में मरीज को 1206 रुपए का भुगतान करन पड़ता है वहीं प्राइवेट असतात में मरीज को चार हजार रुपए तक का भुगतान करना पड़ रहा है। इसकी जानकारी जिले के उपायुक्त कुमुद सहाय को मिली जिसके बाद उन्होंने सदर अस्पताल स्थित डायलिसिस सेंटर का ओचक निरीक्षण किया जहां मरीज और परिजनों से इसकी जानकारी लिया और डायलिसिस सेंटर कंपनी के कर्मचारियों को जमकर फटकार लगाई। उपायुक्त कुमुद सहाय ने बताया कि मैंने कंपनी के चीफ से बातचीत हुई उनका कहना है कि कंपनी की बकाया भुगतान नही मिला है इसके कारण डायलिसिस नही हो पा रही है। लेकिन मैंने साफ शब्दों में कह दिया है जो भी बकाया है उसका भुकतान हो जायेगा। लेकिन किसी भी मरीज का डायलिसिस नही रुकना चाहिए, सदर अस्पताल सी एस को निर्देश दिया गया है कि यदि कंपनी द्वारा डायलिसिस नही करनी की बात करती है तो कंपनी पर एफ आई आर दर्ज कर कानूनी कार्यवाही करें ।
