निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । मिहिजाम, जामताड़ा नगर सहित संपूर्ण जिले में सोमवार को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद का पर्व परंपरागत तरीके से मनाया गया। त्याग और समर्पण के प्रतीक स्वरूप कुर्बानियां दी गई। बकरीद के नमाज पढ़कर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने अमन शांति एवं खुशहाली की दुआएं मांगी। मिहिजाम कृष्णानगर, जामताड़ा के न्यू टाउन स्थित ईदगाह, पाकडीह, सरखेलडीह ईदगाह, मियांडीह, बुधुडीह, नाराडीह, बेवा, धनबाद, चिरूनबांध, शहरपुरा, मोहड़ा, पोसोई सहित अन्य ईदगाहों में बकरीद की नमाज अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज के बाद अमन शांति के लिए अल्लाह ताला से दुआएं मांगी और एक दूसरे को गले लगाकर बधाई दिया। पर्व को लेकर सुबह से ही लोगों में उत्साह देखा गया। नए कपड़े पहनकर लोग विभिन्न ईदगाह और मस्जिदों में जमा होने लगे थे।

मौके पर पाकडीह व सरखेलडीह ईदगाह में नमाज के दौरान संबोधित करते हुए इमाम मौलाना अख्तर रजा ने कहा कि ईद उल अजहा बलिदान और संयम का दिन है। इस्लामी कैलेंडर के अंतिम माह जिलहिज्जा की दसवीं दसवीं तारीख को यह पर्व मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी आत्मा को शुद्ध करने का एक उत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि कुर्बानी में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि दिखावे के लिए न हो। उन्होंने कहा कि हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम ने अल्लाह के हुक्म पर अपने बेटे हजरत इस्माइल अलेही सलाम को कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए थे। अल्लाह को यह अदा काफी पसंद आई। इसके बाद सभी लोगों ने त्याग एवं समर्पण के प्रतीक स्वरूप के अनुसार बकरे की कुर्बानी दी गई।

उसके बाद देर शाम तक कुर्बानियों का सिलसिला चलता रहा। सभी धर्मों के लोगों ने इस्लाम धर्मावलंबियों से गले मिलकर बधाई दी। घर-घर पकवान बने। एक दूसरे के घर जाकर लोगों ने पकवान भी बांटे। मौके पर लोगों ने कहा कि ईद उल अजहा एकता का संदेश देता है एकता से बड़ी कोई दौलत नहीं है। इस दौरान राजनीतिक दलों के लोगों ने भी सक्रियता दिखाई और मुस्लिम बस्तियों में जाकर एक दूसरे को बकरीद की बधाई दी। इस दौरान विधि व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। क्षेत्र के सभी ईदगाहों में बकरीद को लेकर जिला प्रशासन द्वारा नमाज के दौरान दंडाधिकारी तथा पुलिस के जवान तैनात किए गए थे। सभी जगह शांतिपूर्ण रहा।

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