धनबाद । दीपावली पर्व नजदीक आते ही बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है। मिट्टी से बने आकर्षक घरौंदों से बाजार सज गया है। दिवाली को रोशनी का त्योहार माना जाता है। रोशनी के इस पर्व दीपावली में घरौंदा का महत्व बढ़ जाता है। इस पर्व के दौरान घरों में घरौंदा पूजन की परंपरा रही है। घर की सुख-समृद्धि को लेकर बेटियां घरौंदा पूजन करती हैं।
चंदनक्यारी से 20 की संख्या में कुम्हार,मिट्टी का घरौंदा बेचने हीरापुर के बाजार में आएं हैं। यहां अस्थाई दुकान लगाकर घरौंदो की बिक्री कर रहे हैं। बिक्रेता कुम्भकार ने बताया घरौंदों की कीमत 100 रुपये से लेकर 300 रुपये तक निर्धारित है। साइज के अनुसार घरौंदों की बिक्री की जा रही है। घरौंदा के अलावे मिट्टी के दीये, गमला, चुकड़ी आदि चीजें भी विक्रय की जा रही है। उन्होंने बताया दुकान लगाये एक सप्ताह हो चुका है और बिक्री मन मुताबिक नही है। दीपावली से दो या तीन दिन शेष रहने पर बिक्री में जोर पकड़ने की संभावना है।
कुम्भकार ने बताया कि मिट्टी का घरौंदा तैयार करने में मेहनत काफी ज्यादा है। दामोदर से प्रति ट्रेक्टर 1 हजार रू में मिट्टी खरीदते हैं। मिट्टी को लाने के बाद उसमे चिकनाहट लाने के लिए पानी के साथ गुँथा जाता है और यह परिक्रिया तीन – तीन बार की जाती है। इसके बाद घरौंदा बनाकर उसे सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। सुख जाने के बाद भट्टी में तपाया जाता है। फिर भट्टी से निकालकर ठंडा होने के लिए रखा जाता है और इसके बाद आखिरी में रंग चढ़ाया जाता है और फिर जाकर घरौंदा पूरी तरह से तैयार होता है। उन्होंने बताया एक ट्रेक्टर मिट्टी से करीब 500 पीस घरौंदा तैयार होता है और एक घरौंदा बनाने में करीब डेढ़ केजी मिट्टी उपयोग होता है।
