निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा । बुधवार को जामताड़ा के गांधी मैदान में पर्यावरण संरक्षण एवं आदिवासियों के मानवाधिकार के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त का कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि जामताड़ा पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा वरिष्ठ नेता सह पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल सम्मिलित हुए। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी विश्व आदिवासी दिवस का भव्य आयोजन किया गया। इस दौरान जिले भर से आए कलाकारों के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम लोकनृत्य जैसे रिंजा, मातवार ,गोलवारी आदि दुर्लभ नृत्य की प्रस्तुति दी गई। मौके पर मुख्य रूप से उपस्थित विशिष्ट अतिथि पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष वीरेंद्र मंडल ने कहा कि यह कहते हुए मैं बड़ा ही गौरवान्वित हो रहा हूं कि आज ही के दिन इस कार्यक्रम के सम्मान में जामताड़ा के ऐतिहासिक गांधी मैदान का नामकरण सिद्धू कान्हू स्टेडियम के नाम से घोषणा किया हुं, सिर्फ घोषणा ही नहीं किया हूं बल्कि स्थानीय प्रशासन से 74th अमेंडमेंट एक्ट के के तहत प्रदत्त शक्तियों का एक्सरसाइज करते हुए नगर पंचायत के फूल बैंच से संकल्प भी पारित किया हुं।
जामताड़ा रेलवे स्टेशन के समीप एनएसी मार्केट का नामकरण सिद्धू कान्हू मार्केट के रूप में किया हुं। यह भी आश्वासन देता हूं कि इस कार्यक्रम के लिए के लिए जब भी मौका मिलेगा बढ़-चढ़कर सम्मान करुंगा। मेरे मित्रों जब संयुक्त राष्ट्र संघ को यह महसूस हुआ कि आदिवासी समाज सामाजिक आर्थिक और न्यायिक रूप से पिछड़े हैं। इस समाज को मानवाधिकार की जरूरत है और इस सोच के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ ने कार्य दल का गठन किया और वर्ष 1994 के दिसंबर माह में यह घोषणा किया कि विश्व के समस्त संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देशों को 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रुप में मनाया जाना चाहिए। पहली बार 9 अगस्त 1995 से अब तक 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के रुप में मनाया जा रहा है। जामताड़ा के गांधी मैदान में आयोजक मंडली की ओर से प्रतिवर्ष बड़े ही धूमधाम के साथ विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है। पर्यावरण संरक्षण एवं आदिवासियों के मानवाधिकार के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा विश्व आदिवासी दिवस की घोषणा की गई। हम सब को मिलकर आदिवासी समाज के उत्थान के लिए काम करना चाहिए। आदिवासी समाज प्रकृति के पूजक कि नहीं बल्कि जल जंगल और जमीन के संरक्षक भी हैं। आदिवासी मुलत दो शब्दों से मिलकर बना है आदि और वासी आदि का मूल अर्थ है प्राचीन, प्रारंभ और वासी का अर्थ है निवास करने वाले।
अतः हम आदिवासी को मूलवासी भी कह सकते हैं। आदिवासी समाज नदी पर्वत और प्रकृति के पूजन है अगर आज प्रकृति संतुलित है तो उसमें सबसे बड़ा दिन आदिवासी समाज का हैं। आदिवासी हमारे भोलेनाथ जी हैं क्योंकि हम भगवान शिव शंकर को आदि योगी आदि देवता आदिनाथ के रूप से जानते हैं। इस प्रकार सनातन धर्म के सबसे बड़े संरक्षक आदिवासी समाज हैं। विश्व श्रावणी मेले के महीने में विश्व आदिवासी दिवस भी मनाया जाता है। हम सभी सनातनियों को संकल्प लेना चाहिए कि आदिवासी समाज के उत्थान एवं कल्याण के लिए कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करना चाहिए। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर हर वर्ष अपनी ओर से साफ सफाई समुचित व्यवस्था एवं व्यक्तिगत सहयोग भी देता रहा हुं। सभी समस्त देशवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाई। मौके पर मुख्य रूप से कार्यक्रम के संचालक राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक सुशील मरांडी, माझी परगना सरदार महासभा के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर सुनील कुमार हंसदा, सिद्धू कान्हू मुर्मू सेवा समिति के अध्यक्ष आनंद टुडू, जिला परिषद अध्यक्ष राधा रानी सोरेन ,संथाल परगना सरना धर्मगुरु लश्कर सोरेन, वरिष्ठ अधिवक्ता चुन्नीलाल सोरेन , जिमोली बास्की, देवेंद्र मुर्मू, सुरेंद्र टुडू, किरण बेसरा, महेंद्र मंडल समेत हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित रहे।
