वरीय पदाधिकारी ने किया पूछताछ
रामावतार स्वर्णकार
इचाक । प्रखंड के अलौंजा पंचायत के मुखिया सकेंद्र प्रसाद मेहता समेत अन्य मुखिया ने डीसी को इचाक ब्लॉक में पदस्थापित मनरेगा बीपीओ राजीव आनंद के खिलाफ आवेदन दिया था। आवेदन में लगाए गए आरोप की जांच करने वरीय पदाधिकारी सह डीटीओ विजय कुमार मंगलवार को प्रखंड कार्यालय पहुंचे और बीपीओ राजीव आनंद और इचाक प्रखंड के कई मुखिया से जानकारी ली। मुखिया द्वारा डीसी को दिए गए आवेदन में लिखा है कि इचाक प्रखण्ड में कार्यरत बीपीओ राजीव आनंद द्वारा मनमानें तारिके से काम किया जाता है। पंचायत के मुखिया के अन्दर मनरेगा योजनाओं को क्रियान्वयन करने का दायित्व है, परन्तु इनके द्वारा जो भी कार्य किया जाता है उसमें मुखिया की अनदेखी कि जाती है। दिए गए आवेदन में लिखा है की बीपीओं का दायित्व होता है कि क्षेत्र का दौरा कर कार्य को देखना, परन्तु ये कही भी नही जाते हैं। प्रखण्ड मुख्यालय में बैठकर ही कार्य करते है, जिसके कारण विकास नही हो पा रहा है। यहाँ के मजदूरों के सामने भुखमरि की समस्या उत्पन्न हो गई है। मजदुर बाहर पलायन करने पर बेबस है। यह जब से इस प्रखण्ड में आये है तमाम प्रक्रिया को ताक पर रख कर मनमाने तारिके से मनरेगा के काम को करवा रहे है जो किसी भी दृष्टि कोण से उचित नहीं है। साथ में बीपीओ की सहयोगी लेखापाल रामचंन्द्र यादव पर भी आरोप लगाया गया है। इस संबंध में कई मुखिया ने बताया की नियम के अनुसार 5 लाख तक के मनरेगा योजना पंचायत से ही स्वीकृत होना चाहिए, मगर बीपीओ नियम के विरुद्ध जाकर 5 लाख से नीचे की योजना को भी ब्लॉक से स्वीकृति देने का नियम लागू किए हुए है, जिससे लाभुक को किसी भी मनरेगा योजना के लिए ब्लॉक का चक्कर लगाने के लिए बाध्य होना पड़ता है।
बीपीओ राजीव आनंद से पूछे जाने पर बताया की मेरे विरुद्ध दिए गए आवेदन में जो भी आरोप लगाए गए है सारे बेबुनियाद है। मैं नियम विरुद्ध जाकर कोई काम नह
