रामावतार स्वर्णकार
इचाक । एक तरफ जहां पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार कई जागरूकता अभियान और योजनाएं बना रही है वही दुसरी ओर इचाक और दारू थाना क्षेत्र के सीमांत गांव चोरिया, पुनाई और देवकुली गांव के संगम पर स्थित कारीचट्टान के घने जंगल पर इन दिनों लकड़ी तस्करों की बुरी नजर लग गई है। जिसके कारण जंगल का अस्तित्व खतरे में है। यह जंगल बाहर से तो घना दिखता है, लेकिन अंदर से खोखला होता जा रहा है। निर्भीक लकड़ी तस्कर स्वार्थ में अंधे होकर आर्केशिया के मोटे मोटे पेड़ों को काटकर ले जा रहें हैं। बताते चलें कि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इचाक प्रखंड के देवकुली तथा दारू प्रखंड के पुनाई और चोरिया गांव के लगभग 100 एकड़ रैयती भूमि पर डीवीसी के द्वारा वर्ष 2003 में वनरोपण का काम किया गया था। जिसमें आर्केशिया के हजारों पेड़ लगाए गए थे। लेकिन इन दिनों पेड़ो की हो रही अंधाधुंध कटाई से जंगल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।

क्या कहते हैं ग्रामीण – पुनाई गांव निवासी सेवानिवृत डीएसपी प्रताप देव ने बताया कि उक्त जंगल का दोहन कोई नई बात नहीं है। आसपास के लोग चोरी छिपे लकड़ियों को काटकर तथा ट्रैक्टर में लादकर चोरी छिपे बहार – बाहर बेच देते हैं। वन विभाग की टीम छापामारी तो करती है, पर पेड़ों की कटाई पर अंकुश नहीं लग पाया।

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