रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग/इचाक । लगातार मानवीय दोहन से बंजर हुई छबेलवा वन की स्थिति में बीते कुछ वर्षों से व्यापक सुधार आने लगा है। अब वन की न केवल हरियाली धीरे धीरे लौटने लगी है, बल्कि दर्जनों एकड़ भूमि पर वन का विस्तार भी हुआ है। वन में अच्छादित साल (सखुआ) के पेड़ों समेत कई प्रकार के वनस्पतियों का उत्तरोत्तर विकास भी देखने को मिल रहा है। और यह सब मुमकिन हो पाया है पर्यावरण प्रेमी और समाजसेवी जीतेश्वर मेहता ऊर्फ बिरजू मेहता जी के कारनामों से। जी हां! बिरजू मेहता प्रखंड के करियायपुर गांव में रहते है और पेशे से एक निजी शिक्षक हैं। और वर्तमान में राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के हजारीबाग जिला अध्यक्ष भी हैं।
पर्यावरण से लगाव ऐसा कि महीने के हर एक तारीख को पहुंच जाते हैं पेडों को रक्षा सूत्र बांधने। उन्होंने बताया कि इन उजड़ते वनों को बचाने का संकल्प मुझे पर्यावरणविद महादेव महतो जी से मिला जिन्होंने टाटीझरिया प्रखंड के दूधमटिया वन को बचाने के लिए पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधना प्रारंभ किया। उनसे प्रेरणा लेकर बिरजू मेहता जी ने मोक्तम्मा के छबेलवा वन में भी पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधने और पर्यावरण महोत्सव का आयोजन कर लोगों में जागरुकता लाने की मुहिम छेड़ी। जन,जंगल एवं जल बचाव समिति का गठन हुआ। और शुरू हो गया पर्यावरण संरक्षण का जागरूकता अभियान।
उनके इस मुहिम में पत्रकार महेश कुमार मेहता, रामावतार स्वर्णकार, डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. कौशल कुमार, हृदयांशु कुमार, प्रो. रामप्रकाश मेहता, सीताराम कुशवाहा भी शामिल हुए। हालांकि विगत 14 वर्षों से चल रहे इस जागरुकता कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों ने कभी कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। बावजूद इसके स्थानीय लोगों के प्रयास से चल रहे पर्यावरण संरक्षण जागरूकता अभियान का असर जल्द ही दिखने लगा। आज छबेलवा वन समेत आसपास के जंगलों में न केवल हरियाली बढ़ी है, बल्कि कई हेक्टेयर भूमि पर जंगल का विस्तार भी हुआ है।
वर्तमान में समिति के इस मुहिम में बतौर अध्यक्ष बद्री प्रसाद मेहता, उपाध्यक्ष संजय कुमार मेहता, सचिव रीतन प्रसाद मेहता, कोषाध्यक्ष शिव कुमार मेहता, सह सचिव सुरेश प्रसाद मेहता, सलाहकार डॉ. कौशल कुमार मेहता, रंजित कुमार भी जुड़े।
