बारिश का कहर

खपरैल मिट्टी का मकान धंसा,
मलवे में चार मासूम और पिता दबे, बाल बाल बचे।

घायलों को इचाक पुलिस ने पहुंचाया अस्पताल

राहत कार्य में मुखिया आई आगे, हर संभव मदद का दिया भरोसा

रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग /इचाक । बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण पिछले 72 घण्टे से रुक रुककर हो रही बारिश का असर इचाक प्रखंड क्षेत्र में भी दिखने लगा है। इस अनियंत्रित बारिश के कारण प्रखंड के जमुआरी निवासी निवासी पंकज गिरी का खपरैल मिट्टी का मकान धंस गया। जिससे घर के अंदर सो रहे मकान मालिक पंकज गिरी एवं उसके चार बच्चे दब गए। घटना मंगलवार को 11 बजे रात घटी। हल्ला सुन पड़ोस के ग्रामीण जुटे एवं मलवे के नीचे दबे सभी लोगों को बाहर निकाला।

खपरैल मकान का लकड़ी, बांस ओर मिट्टी गिरने से पंकज गिरी एवं दो बच्चे रियांश (2 वर्ष) एवं आलोक ( 12 वर्ष )घायल हो गए, जबकि दो जुड़वा बहन रिद्धि एवं सिद्धी ( 6 वर्ष ) बाल- बाल बच गई। सूचना पाकर देर रात इचाक पुलिस पहुंची। तीनों घायलों को सामुदायिक अस्पताल इचाक में भर्ती कराया। सूचना पाकर मंगुरा पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि रामशरण शर्मा जमुआरी गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। सभी घायलाें से मिलने सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र इचाक पहुंचे । तथा हर संभव मदद का आश्वासन दिया। घायलों को प्राथमिक इलाज करवाने के बाद घर भेज दिया गया।

घटना के सम्बंध में पंकज की पत्नी तेजनी देवी ने बताया कि हम शौच के लिए घर से बाहर निकले उसी दौरान घर गिर गया। मैं चिल्लाने लगी तो पड़ोस के लोग जुटे। इसके बाद बच्चों एवं मेरे पति को किसी तरह से मलवे से बाहर निकाला। इधर बेघर पीड़ित परिवार मुखिया मीना देवी के सलाह पर जमुआरी स्थित विद्यालय भवन में शरण लिया है। उन्होनें बीडीओ रिंकु कुमारी तथा उपायुक्त से पीड़ित परिवार समेत अन्य कई जरूरतमंदों को पीएम आवास दिलाने की मांग की।

बताते चलें कि पिछले साल के बरसात में जमुआरी गांव निवासी बनवारी गिरी का घर गिर जानें से वह पूरी तरह से बेघर पड़ोसी के बरामदे में 9 माह तक बिताया। इस बीच उसने एक अदद पीएम आवास के लिए अपनी फरियाद जनता दरबार में अधिकारियों के समक्ष कई बार उठाया। किंतु अबतक उसे पीएम आवास नसीब नहीं हुआ। थक हारकर वह अपने टूटे फूटे मकान में ही रहने को अभिशप्त हैं। जमुआरी गांव निवासी प्रदीप गिरी, अशोकगिरी, द्रौपति मसोमत, मंगल गिरी, छेदी गिरी, प्रमोद गिरी, रामानंद भारती, पप्पू गिरी, लोकनाथ गिरी समेत कई ऐसे लाचार परिवार अपने क्षतिग्रस्त आशियाने में रहने को अभिशप्त हैं, जो कभी भी बड़ी घटना का कारण बन सकता है।

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