रामावतार स्वर्णकार
इचाक । हाल ही में महाराष्ट् और बिहार में हुए सियासी उठापटक को लेकर जेएम इंटर कॉलेज, उरुका के प्रोफेसर राजेंद्र यादव ने अपने एक आलेख में भारतीय जनता पार्टी को एक दमनकारी पार्टी के रुप में प्रस्तुत करते हुए लिखा कि किस प्रकार भाजपा क्षेत्रीय पार्टियों के समक्ष सांप छुछुंदर वाली स्थिति पैदा करती जा रही है, जिससे क्षेत्रीय पार्टियां अपने अस्तित्व के लिए जद्दोजहद करती नजर आ रही है। उन्होंने लिखा कि पहले चिराग़ पासवान को बाहर भीतर से समर्थन देकर जदयू की सीटें घटाई गईं, उसके बाद जीते हुए विधायकों को तोड़ने की लगातार कोशिशें होती रहीं। नीतीश कुमार को समाप्त करने के लिए राजद को हर तरह का लालच दिया गया, यहां तक कि तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री बनाने तक का आफर दिया गया। पद के लोभी आरसीपी सिंह उनके संपर्क में पहले से थे ही। इधर जब शिवसेना के 40 विधायकों को तोड़ लिया गया तब जदयू के 30 विधायकों को तोड़ना उनके लिए आसान लगने लगा। समय रहते नीतीश कुमार ने आरसीपी को दरकिनार करके जदयू को बचा लिया। शाह जी येन-केन-प्रकारेण बिहार में भाजपा की सरकार बनाने के लिए प्रयासरत हैं, उन्हें होना भी चाहिए, लेकिन नीतीश को अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए दोषी क़रार देना कहाँ तक उचित है।
उन्होंने आगे लिखा महागठबंधन के बैनर तले जीतने वाले नीतीश कुमार जब महागठबंधन को छोड़कर भाजपा के साथ चले गए तब तो बड़े अच्छे थे, पलटू राम नहीं थे अब पुनः महागठबंधन के जनाधार का सम्मान करते हुए वापस लौट आए हैं तो बुरे हो गए, पलटू राम हो गए हैं। नीतीश कुमार अपनी पार्टी को भाजपा का निवाला बना देते तो ठीक था लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी की हिफ़ाज़त के लिए समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राजद से गठबंधन कर लिया है तो बुरे हो गए हैं। जो भाजपा के साथ रहे वो साधू है, उसके सारे गुनाह माफ़ हैं और जो भाजपा के विरोध में रहे वो अपराधी है उसके लिए ईडी तैयार खड़ी है, यही माइंडसेट तैयार किया गया है।
बिहार की राजनीति का एक ध्रुव लालू यादव जी आज भी हैं, जो बिना किसी समझौते के सांप्रदायिक शक्तियों के ख़िलाफ़ लगातार लड़ते रहे हैं। एक से एक चोर इस देश में भरे पड़े हैं लेकिन लालू यादव को जिस तरह चारा घोटाले में पीस पीसकर उनकी राजनीतिक और शारीरिक हत्या का प्रयास किया जा रहा है वो साबित कर रहा है कि उन्हें आडवाणी जी के रथ को रोकने की सज़ा दी जा रही है।
बिहार आंदोलन की भूमि रही है, समाजवाद की भूमि रही है, उत्तर प्रदेश की तरह सांप्रदायिक दंगों की नहीं। आज देश में जनता महंगाई से कराह रही है, बेरोज़गारी से कराह रही है, लेकिन खुलकर चिल्ला नहीं रही है, कारण कि उनके दिमाग़ में भर दिया गया है कि मुसलमान देशद्रोही हैं, मुसलमान कट्टर हैं, मुसलमान दोयम दर्जे के नागरिक हैं, मुसलमान भारत की सत्ता पर क़ब्ज़ा करना चाहते हैं और उन्हें रोकने के लिए मोदी जी शाह जी का रहना हर हाल में ज़रुरी है। इस विचारधारा के प्रभाव में बिहार के चार-पांच ज़िले ही अबतक आए हैं बाक़ी पूरा बिहार आज भी समाजवादी धर्मनिरपेक्ष राज्य बना हुआ है।
भारत की धर्मनिरपेक्ष समाजवादी गणतंत्र की आत्मा की हिफ़ाज़त के लिए नीतीश कुमार का इस कृत के लिए समर्थन करता हूँ।
