पाथरडीह । कोयलांचल की प्रसिद्ध डिगवाडीह सर्कस मैदान गणेश महोत्सव की तैयारियों के बीच मेला और चंदा राशि को लेकर विवाद गहरा गया है। बुधवार को जोरापोखर थाना में हुई दूसरी समझौता वार्ता भी विफल हो गई। दोनों पक्षों के बीच तनाव बरकरार है। विवाद सुलझाने के लिए जोरापोखर थाना में बैठक हुई। विरोधी गुट ने पूजा कमिटी में अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष के पदों में से दो प्रमुख पद मांगे। पूजा कमिटी ने इसे मानने से इनकार कर दिया। कमिटी का कहना है कि विरोधी गुट को कोषाध्यक्ष का पद और निगरानी समिति में जगह दी जा सकती है। कमिटी ने आरोप लगाया कि पूजा में आज तक विरोधियों का कोई योगदान नहीं रहा। कुछ लोग पर्दे के पीछे से साजिश कर पूजा में खलल डाल रहे हैं। कमिटी के साथ स्थानीय लोगों का समर्थन होने का भी दावा किया गया। कमिटी के अध्यक्ष जगजीवन राम, सचिव मोहन यादव सहित अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि कोयलांचल में पहला भव्य गणेश मंदिर बनते देख विरोधियों को परेशानी हो रही है। उन्होंने बताया कि मेला से होने वाली आय से ही पूजा और मंदिर निर्माण किया जाता है। इस वर्ष पूजा से पहले ही 10 लाख रुपये मंदिर निर्माण के लिए अलग रखे गए हैं। मंदिर निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है और अगले 2 वर्षों में प्राणप्रतिष्ठा की संभावना है। जबकि विरोधी गुट का आरोप है कि मेला से मिलने वाली लाखों रुपये की राशि का उपयोग मंदिर निर्माण में न करके फिजूलखर्ची में किया जा रहा है। बताते चलें कि डिगवाडीह सर्कस मैदान में 38 वर्ष पहले छोटी पंडाल से शुरू हुई गणेश पूजा आज पूरे कोयलांचल में प्रसिद्ध है। पूजा के साथ भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प भी कमिटी ने लिया था। फिलहाल दोनों पक्षों में सहमति नहीं बनने से महोत्सव की तैयारी प्रभावित हो रही है।
