निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा । सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। गुरुवार को इलाज और आवश्यक संसाधनों के अभाव में तीन वर्षीय मासूम की मौत के बाद शहर में भारी आक्रोश देखा गया। इस घटना ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को उजागर कर दिया है। जानकारी के अनुसार जामताड़ा बाजार निवासी संटू साव के तीन वर्षीय पुत्र अंशु को अचानक पेट दर्द और उल्टी की शिकायत हुई। परिजन उसे तुरंत सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने पर वहां कोई शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं था और बच्चे को देने के लिए ऑक्सीजन की भी व्यवस्था नहीं थी। परिजनों के मुताबिक काफी देर तक अस्पताल में अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। बाद में अस्पताल प्रबंधन ने अपनी असमर्थता जताते हुए बच्चे को बाहर किसी बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन जब उसे बेहतर इलाज के लिए आसनसोल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी रास्ते में मासूम ने दम तोड़ दिया। घटना के विरोध में शुक्रवार को शहर के लोग समाहरणालय पहुंचे और उपायुक्त को मांग पत्र सौंपा। स्थानीय नागरिक जीतू सिंह और आकाश सहित अन्य लोगों ने अस्पताल की व्यवस्था सुधारने की मांग की। उनका कहना था कि सदर अस्पताल में बच्चों के डॉक्टर, आईसीयू और पर्याप्त ऑक्सीजन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण एक मासूम की जान चली गई। उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द अस्पताल की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। समाहरणालय के बाद प्रदर्शनकारी और मृतक के परिजन जामताड़ा के इंदिरा चौक पहुंचे, जहां उन्होंने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का पुतला दहन किया और उनके खिलाफ नारेबाजी की। स्थानीय लोगों का कहना था कि जामताड़ा से ही स्वास्थ्य मंत्री होने के बावजूद यहां की चिकित्सा व्यवस्था बेहद खराब है और अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। यह घटना एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।
