कुमार अजय
धनबाद । मेंमको मोड़ के समीप स्थित उपायुक्त कार्यालय के समक्ष आदिवासी समाज ने जन आक्ररेश महारैली के माध्यम से आदरणीय राष्ट्रपति महोदया, माननीय प्रधानमंत्री, गृहमंत्री से मांग किया जा रहा है कि झारखण्ड में कुर्मी जाति समूह द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग में शामिल होने हेतु गैर संवैधानिक मांग किया जा रहा है। जिसका आदिवासी समाज पुरजोर विरोध करता है। हाल के दिनों में जिस प्रकार रेल टोका आंदोलन को देखा गया उससे स्पष्ट है भाजपा एवं आजसू द्वारा प्रायोजित आन्दोलन के माध्यम से राजनीतिक जमीन बचाने की पृष्ठभूमि तैयार किया जा रहा है और इस आदिवासियों का आचरण व आस्मिता के साथ खेलवाड करते कुर्मी जाति के आदिवासी श्रेणी में सूचीबद्ध करने की मांग को हवा देकर झारखण्ड को अशांत कर इसे वोट का ध्रुवीकरण करने का साजिश किया जा रहा है। भाजपा सरकार द्वारा देश में कई गैर संवैधानिक नियम व बिल पारित किया गया है। जिससे आदिवासी समाज भयभीत एवं आक्रोशित है और आंदोलन करने को विवश है। कुर्मी जाति एक कृषक जाति से आते है जो सीएनटी एक्ट 1908 और 1938 Amendment Act में ट्राईवल में सूचीबद्ध नहीं है तथा विभिन्न जनगणना में 1872 से 1941 तक किसी धार्मिक सूची व जनजाति सूची में इसकी गणना नहीं की गई है। इसके बावजूद झुठा तर्क व प्रमाण के आधार पर दवाबपूर्ण आंदोलन खड़ा किया जा रहा है। इसका प्रतिरोध में आदिवासी हर तरह का आंदोलन करने का प्रण ले चुका है।कतरास के काको में सिन्धो कान्हो के आदमकद प्रतिमा में माल्यार्पण कर धनबाद पहुचे।
रैली को सनातन सोरेन,रतिलाल टुडू,अनिल टुडू,संजय सोरेन,गुरुचरण बास्की,मनसा राम मुर्मू,
अरुण हेम्ब्रम,संजय मरांडी,करमचंद सोरेन,मनमोहन टुडू,लक्ष्मी मुर्मू,राजेन्द्र किस्कू,सुरजकांत सोरेन
संदीप हांसदा,लखिन्द्र हेम्ब्रम
फुलचद किस्कू,प्रशांत हेम्ब्रम,
महालाल सोरेन,
रविशंकर बास्की, सप्रेस हांसदा,सुशील हेम्ब्रम,विजय टुडू, प्रदीप सोरेन, नीलेश हेम्ब्रम सहित हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।
