सांकेतिक भाषा दिवस पर बच्चों ने “मूक बधिर हमें है आशा, हम पढेंगे सांकेतिक भाषा” का नारा बुलंद किया

झरिया । समावेशी शिक्षा के झरिया रिसोर्स सेंटर के तत्वावधान में अंतराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर झरिया के गुजराती हिंदी मध्य विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया । बच्चों को साइन लैंग्वेज की जानकारी दी गई । मूक बधिर लोगों के साथ आदर्श व्यवहार करने को प्रेरित किया गया । विद्यालय के सभी बच्चों को अल्फाबेट सांकेतिक भाषा मे सिखाया गया । सभी बच्चों ने ” मूक बधिर हमें है आशा, हम पढेंगे सांकेतिक भाषा” का नारा बुलंद किया ।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ मनोज सिंह ने कहा कि सांकेतिक भाषा का ज्ञान सभी को होना चाहिए ताकि मूक बधिर की अभिव्यक्ति को हम भी समझ सकें । झरिया के कई मूक बधिर बच्चे सांकेतिक भाषा का ज्ञान प्राप्त कर आगे बढ़ रहे हैं । इस भाषा का प्रचार प्रसार की आवश्यकता है । डॉ मनोज ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य समावेशी समाज की दिशा में कदम बढ़ाना एवं सांकेतिक भाषा के माध्यम से संवाद को बढ़ावा देना है।
स्पेशल एडुकेटर अखलाक अहमद ने कहा कि मूक वधिर बच्चों को सामान अवसर एवं पूर्ण भागीदारी मिलनी चाहिए । जागरूकता कार्यक्रम समय-समय पर चलनी चाहिए और दिव्यांग जनों को मिलने वाली शिक्षा, चिकित्सा, सुविधाओं के बारे में प्रचार प्रसार भी होनी चाहिए ।
मो अखलाक ने कहा कि सांकेतिक भाषा हाव भाव आधारित है जिसमें हाथों के संकेत चेहरे का भाव,एवं शारीरिक हाव भाव का प्रयोग कर संवाद किया जाता है ।
कार्यक्रम में रिसोर्स सेंटर के फिजियोथेरेपिस्ट डॉ मनोज सिंह, स्पेशल एडुकेटर अख़लाक़ अहमद, प्रधानाध्यापक विवेक कुमार सिंह, उच्च विद्यालय के लक्ष्मी नारायण सर, राहुल चौबे, शिक्षक दिलीप सिंह , मनोज झा, अनिल झा, सुलेखा कुमारी सहित बड़ी संख्या में बच्चे उपस्थित थे ।

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