निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । वैश्विक शोध व्यवस्था पर कृत्रिम बौद्धिकता का प्रभाव विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन नगर भवन मिहिजाम में आयोजित किया गया। सेमिनार का आयोजन जनजातीय संध्या डिग्री महाविद्यालय एवम टूकोन रिसर्च एंड डेवलपमेंट बेंगलुरु के संयुक्त तत्वाधान में किया गया। कार्यक्रम का शुभआरंभ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन से हुई। इस अवसर पर विद्वानों एवम स्कॉलर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से मानव जीवन पर पड़ रहे प्रभावों पर विचारों को व्यक्त किया। इस अवसर पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा आज का युग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। हमें इसे शिक्षा, स्वास्थ्य और अनुसंधान के साथ जोड़कर समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना होगा। झारखंड की धरती हमेशा से ज्ञान और संघर्ष की भूमि रही है और मैं चाहता हूँ कि यहां से भी दुनिया को नई दिशा देने वाले शोध सामने आएं। सेमिनार में बतौर सभापति पी के झा प्रोग्राम कॉर्डिनेटर सीमर फाउंडेशन नेपाल ने इस अवसर पर कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका आज के वैश्विक परिपेक्ष में समीचीन है। मानव शुरुआत से ही खोजी प्रवृत्ति का रहा है उसने जहां जरूरत समझ वहां अनुसंधान खोज शुरू कर दिया। आज वैश्विक परिदृश्य में कृत्रिमता बुद्धिमता की जरूरत महसूस की जा रही है। हमें भी अनुसंधान जारी रखना है। उन्होंने इसके सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव की चर्चा कर कहा कि नकारात्मक के बजाय सकारात्मक परिणाम की ओर बढ़ना है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका आज विकास के सभी आयामों में है।यह तत्परता से परिणाम देता है।इसका स्वागत किया जाना चाहिए। मौके पर विनोद कुमार शर्मा पी जी हेड मनोविज्ञान सिद्धू कानू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका ने इस अवसर पर कहा कि ए चाय कितनी भी तरक्की कर ले मानवीय सोच और संवेदना का मुकाबला वह नहीं कर सकता है। वर्तमान समय में लोग कॉपी पेस्ट की प्रवृत्ति के शिकार हो रहे हैं। नेचुरल स्टडी की आवश्यकता है कॉपी पेस्ट की प्रवृत्ति नुकसानदायक है।
पूर्व एसडीओ जामताड़ा नवीन कुमार ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के छेत्र में विश्व काफी आगे निकल चुका है हम इसमें पीछे रह गए हैं, लेकिन देर से ही सही इस दिशा में भारत ने काफी तरक्की की है,और आज एक अलग पहचान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंटेलिजेंस के क्षेत्र में बनाई है। स्वास्थ्य शिक्षा उद्योग सहित अन्य क्षेत्रों तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की पहुंच हो गई है। डॉ विनय
कुमार सिन्हा पूर्व डीन सोशल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज दुमका, पीजी हेड रसायन शास्त्र विभाग हसमत अली सिद्धू कानू मुर्मू विश्वविद्यालय दुमका, लाल बहादुर स्वर्णकार दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉ मो0 रिजवान ने, कृष्ण मुरारी झा एफटीआई जमशेदपुर, ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अपने विचारों को रखा। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर कृष्ण मोहन साह, डॉ राकेश रंजन टूकोन बेंगलुरु के केतन मिश्रा सहित काफी संख्या में शिक्षक एवं छात्रगण मौजूद थे।

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