अभिषेक मिश्रा

चासनाला | सुदामडीह न्यू माईनस स्थित खुदीराम बोस खेल मैदान में राष्ट्र आराधना मंच की ओर से आयोजित श्रीरामोत्सव अनुष्ठान के सातवें दिन श्रीराम कथा के दौरान अयोध्या से पधारे पंडित अभिषेक कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि एक आदर्श पुत्र का कर्तव्य होना चाहिए कि माता पिता का आज्ञा का सदा पालन करे। श्री राम ने हमें यही संस्कार दिया है कि श्री राम के चरित्र का अनुपालन करे।

उन्होंने कहा कि श्री राम जी के बिबाह के बाद जब बरात अयोध्या लौटी तो महाराजा दशरथ जी ने श्री राम को राजा बनाने का प्रस्ताव रखा। सारी अयोध्या की जनता में खुशी का लहर दौड़ गई। श्री राम जी को जब पता चला तो विचार किया कि अगर मैं राजा बन गया तो जो ऋषि मुनि वर्षों से वन में प्रतिक्ष कर रहे है उनका क्या होगा। उनको जाकर दर्शन नहीं दिया तो वे निराश हो जाएंगे। इस लिए राम जी ने वन जाना सहज ही स्वीकार कर लिया।

उन्होंने कहा कि माता कैकई राम जी से जितना प्रेम करती थी,उतना प्रेम अपने पुत्र भरत से भी नहीं करती थी। बचपन में एक बार श्री राम ने माता कैकई से कहा कि माँ मैं कुछ मांगना चाहता हूँ, कैकई ने कहा कि राम माँगों मैं अपनी प्राण दे सकती हूँ। राम जी ने कहा कि मैं जो मांगना चाहता हूँ उससे हो सकता है कि तुम्हें अपने माँग का सिंदूर धोना पड़े। और भरत तुम्हें माँ कहना बंद कर दे। तब मैया कैकई ने कहा कि राम तुम मुझे माँ कहोगे तो दुनियां की कोई चीज का हमे परवाह नहीं है। कैकई ने राजा दशरथ जी से जो बरदान मांगा वह राम जी ने माता कैकई से बचपन में ही बचन के रूप में ले लिया था। पंडित पुरुषोत्तम शास्त्री अयोध्या वैदिक मर्मज्ञ पूजा अर्चना करने में जुटे हुए हैं।
श्रीरामोत्सव अनुष्ठान को सफल बनाने में मंच के अध्यक्ष डॉ बिरेन्द्र कुमार,संयोजक संजय सिंह,अमित सिंह,दिलीप सिंह, सुनील पाठक,भरत रवानी,रविन्द्र प्रसाद, राहुल सिंह, राजू तिवारी ,रवि वर्मा, मंजय बाउरी,रामानन्द पासवान, रंजीत सिंह आदि की सराहनीय योगदान है।

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