निशिकांत मिस्त्री
जामताड़ा : पेसा दिवस के अवसर पर पेसा ग्राम पंचायतों में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन जिले के सभी पंचायतों में की गई। इसी कड़ी में शिउलीबाड़ी पंचायत में भी पेसा दिवस के मौके पर पंचायत सचिव रविन्द्र सिंह, मुखिया शिवधन हांसदा, जी आर एस नन्ही कुमारी शर्मा, समिति सचिव प्रतिनिधि अमर मंडल, उप मुखिया प्रतिनिधि, वार्ड सदस्य व सैंकड़ों ग्रामीण मौजूद थे। जहाँ मुखिया शिवधन हांसदा ने पेसा दिवस के मौके पर सभी का अभिनंद करते हुवे पेसा कानून के बारे में विस्तृत रूप से बताया उन्होंने कहा कि पेसा 1996 एवं झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के बारे में माननीय न्यायालय द्वारा पारित आदेश, 1. पेसा 1996 एवं झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के बारे में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वाद (Civil Appeal No. 484 & 491/2006, राकेश कुमार एवं अन्य बनाम भारत सरकार) में पारित आदेश अनुसूचित क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया वैध है। जिला पंचायत / पंचायत समिति / ग्राम पंचायत में चेयरपर्सन (अध्यक्ष/प्रमुख / मुखिया) सीट पर 100% अनुसूचित जन जाति को आरक्षण, 50% आरक्षण – अनुसूचित क्षेत्रों में अन्य जन प्रतिनिधियों के सीट पर 80% तक आरक्षण, झारखण्ड पंचायती राज 2001 अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार हेतु एक वैध कानून है।
पेसा 1996 एवं झारखंड पंचायत राज अधिनियम 01 के बारे में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा वाद (WPIL No. 2549/2010 प्रभु सैमुअल सुरीन बनाम झारखण्ड सरकार) में पारित आदेश में झारखण्ड पंचायती राज कानून 2001 को पेसा क्षेत्र के लिए सही पाया है, छठवी अनुसूची के प्रावधान पांचवीं अनुसूची क्षेत्र पर नहीं लागू किए जा सकते है। पांचवी अनुसूची के “पैटर्न” के अनुसार किए जा सकते है, पेसा 1996 को झारखंड पंचायत राज अधिनियम बनाने में पूर्ण रूप से पालन किया गया है, माननीय उच्च न्यायलय, झारखण्ड के निर्णय को माननीय सर्वोच्चय न्यायालय में चुनौती दी गयी, जिसे माननीय सर्वोच्चय न्यायालय में ख़ारिज कर दिया गया। उन्होंने आगे कहा कि पेसा 1996 के अनुसार गाँव की परिभाषा “ग्राम साधारणतया आवास या आवासों के समूह अथवा पुरबां या पुरबों के समूह से मिलकर बनेगा जिसमें समुदाय समाविष्ट हो और जो परंपराओं तथा रुढ़ियों के अनुसार अपने कार्यकलापों का प्रबंध करता हो”, “ग्राम” का तात्पर्य है कोई ऐसा ग्राम, जिसे राज्य सरकार द्वारा सरकारी गजट में अधिसूचना के द्वारा इस अधिनियम के प्रयोजनार्थ ग्राम के रुप में विनिर्दिष्ट किया गया है, जिसके अन्तगत है इस प्रकार विनिर्दिष्ट किए गए ग्राम या ग्रामों/टोलों का समूह। शब्द “ग्राम” में सम्मिलित है, राजस्व गांव, परन्तु अनुसूचित क्षेत्र में ग्राम का तात्पर्य है अनुसूचित क्षेत्र में कोई ऐसा ग्राम जिसमें साधारणतया आवास या आवासों का समूह अथवा टोला या टोलों का समूह होगा, जिसमें समुदाय समाविष्ट हो अथवा जो परम्पराओं और रुढियों के अनुसार अपने कार्यकलापों का प्रबंध करता है, ग्राम सभा द्वारा योजना बनाने के बारे में प्रावधान है, पेसा 1996 के अनुसार ग्राम सभा को नियोजन की संस्था के बारे में प्रावधान है। “प्रत्येक ग्राम सभा सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं का इसके पूर्व कि ग्राम स्तर पर पंचायत द्वारा ऐसी (i) योजनाओं, कार्यक्रमों और परियोजनाओं को कार्यान्वयन के लिए हाथ में लिया जाए, अनुमोदन करेगी।।झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 के अनुसार ग्राम सभा को नियोजन की संस्था के बारे में प्रावधान जिसमें उन नियमों के अधीन जो राज्य सरकार इस हेतु बनाये और ऐसे साधारण या विशेष आदेशों के, जो राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किए जाएँ, अधीन रहते हुए, ग्राम सभा के निम्नलिखित कृत्य होंगे। ग्राम के आर्थिक विकास के लिए योजनाओं की पहचान करना तथा उनकी प्राथमिकता निर्धारित करने के लिए सिद्धांतो का निरुपण करना। समाजिक तथा आर्थिक विकास के लिए ऐसी योजना, जिसमें ग्राम पंचायत स्तर की सभी वार्षिक योजनाओं सम्मिलित हैं, कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं का क्रियान्वयन करने से पूर्व अनुमोदित करना, ग्राम पंचायत के वार्षिक बजट पर विचार-विमर्श पर उस पर सिफारिशें करनाय।
पेसा 1996 के अनुसार पंचायतों के अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए स्थानों के आरक्षण के बारे में प्रावधान
अनुसूचित क्षेत्रों में की प्रत्येक पंचायत में स्थानों का आरक्षण, उस पंचायत में उन समुदायों की संख्या के अनुपात में होगा जिनके लिए संविधान के भाग 9 के अधीन आरक्षण दिया जाना है। परंतु अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण, स्थानों की कुल संख्या के आधे से कम नहीं होगा। परंतु यह और कि पंचायत के अध्यक्षों के सभी स्थान सभी स्तरों पर अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित रहेंगे।
ग्राम पंचायत के सदस्यों के लिए (अनुसूचित क्षेत्र में) अनुसूचित क्षेत्रों में प्रत्येक ग्राम पंचायत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थान का आरक्षण उस पंचायत में अपनी-अपनी जनसंख्या के आधार पर होगा। अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों को ऐसी शक्तियां और प्राधिकार प्रदान करते समय जो उन्हें स्वायत्त शासन की संस्थाओं के रूप में कार्य करने में समर्थ बनाने के लिए आवश्यक हों, राज्य विधान-मंडल यह सुनिश्चित करेगा कि पंचायतों और ग्राम सभा को उपयुक्त स्तर पर विनिर्दिष्ट रूप से ग्राम बाजारों का, चाहे वे किसी भी नाम से ज्ञात हों, प्रबंध करने की शक्ति प्रदान की जाए।
