गिट्टी, बालू नहीं मिलने से निर्माण कार्य हो रहा बाधित, ठेकेदार परेशान

रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग/इचाक । नेशनल पार्क इको सेंसिटिव जोन के आड़ में झारखंड सरकार के इशारे पर ज़िला प्रशासन द्वारा इचाक के सैकड़ो क्रेशर तोड़े जाने और पत्थर खदानों को बंद किए जाने के कारण एक तरफ बेरोजगारी और भुखमरी बढ़ गई है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्र में गिट्टी का खासा अभाव देखने को मिल रहा है, जहां एक तरफ गिट्टी के दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है, वहीं पकड़े जाने के डर से कोई गाड़ी वाला गिट्टी लाने को तैयार नहीं होता।

झारखंड सरकार द्वारा बालू घाटों को लीज नहीं देने के कारण बालू मिलने में भी काफ़ी परेशानी हो रही है। परिणाम स्वरूप गिट्टी और बालू के अभाव में भवन, सड़क और पुल पुलिया निर्माण में काफ़ी परेशानी हो रही है। लोग पत्थर (बोल्डर) को निर्माण स्थल पर लाकर मजदूरों से तुड़वाकर गिट्टी बनाते और निर्माण कार्य में लगाते देखे जा रहे हैं।

क्या कहते हैं ठेकेदार

इचाक-पुनाई पथ पर स्थित फुरुका नदी पर बना जर्जर पुल के मरम्मती करवा रहे ठेकेदार बसन्त नारायण सिंह ने बताया कि गिट्टी और बालू समय पर नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य बाधित हो रहा है। गिट्टी की कीमत पहले 3500-4000 रुपए प्रति 100 सीएफटी था, जो अब बढ़कर 7500 से 9000 रुपए हो गया है। वहीं, बालू 2500-3500 रुपए प्रति ट्रेक्टर हो गया है। वावजूद इसके पकड़े जाने के डर से कोई गाड़ीवाला लाने को तैयार नहीं होता। लेबर द्वारा पत्थर को तोड़कर निर्माण कार्य के लायक गिट्टी बनाया जा रहा है। जिसमे काफ़ी वक्त लग जाता है।

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