डुमरौन क्रेशर में सरकारी की कार्रवाई पर गरजे पूर्व सांसद
और भी थे विकल्प, सरकार की मंशा साफ़ नहीं – डॉ. रविन्द्र रॉय
रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग/इचाक । कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद सह झारखंड के पहले खान मंत्री डॉ. रविन्द्र रॉय पिछले दिनों एक कार्यक्रम के दौरान इचाक आए। उन्होंने प्रखंड के डूमरौन क्रेशर माइंस पर प्रशासन द्वारा चलाए गए बुलडोजर पर अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने डूमरौन में स्थित 100 से अधिक क्रेशर की संरचना को पुरी तरह से नेस्तनाबूत करने के सरकार के क्रूर फैसले पर शंका जाहिर किया। कहा कि झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजी रोजगार का एक बहुत बड़ा साधन क्रेशर उद्योग रहा है।
हजारों गरीबों को इससे रोज़गार मिलता है। पुल पुलिया, सड़क, भवन से लेकर पीएम आवास बनाने में इस उद्योग का बहुत बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में प्रदूषण के सरकारी मानक को ध्यान में रखते हुए और नियमों में उदारता लाते हुए बीच का कोई रास्ता निकालना चाहिए था। लेकिन नियम और कानून के आड़ में वर्तमाम हेमंत सरकार प्रदेश के गरीब जनता और क्रेशर व्यवसाईयों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का हवाला देकर वर्तमान सरकार ने गरोबों का निवाला छीनने का काम किया है।
मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पिछले 15 वर्षों में माइंस डिपार्टमेंट का ज़िला स्तर के अधिकारियों के साथ किसी मंत्री की बैठक नही हुई है। मुख्यमंत्री आज स्वयं खान मंत्री हैं। अपने कार्यकाल में भी इन्होंने उक्त समस्याको लेकर किसी डीएमओ के साथ मीटिंग नही की तो सैकड़ो क्रशरों को ध्वस्त करने का निर्णय किस आधार पर ली गई? अगर क्रेशर संचालन को ही बंद करना था तो क्रेशर का एक संयत्र ही अधिकारी खोलकर ले जाते। फिर क्रेशर की संरचना को पूरी तरह से नेस्तनाबूत करने के पीछे मंशा क्या थी? ये समझ में नहीं आया।
उन्होंने कहा कि सरकार पत्थर व्यवसायों के साथ मिलकर बीच का कोई रास्ता निकाले और क्रेशर मालिकों के नुकसान की शत प्रतिशत भरपाई करे। बताते चलें कि प्रखंड के डूमरौन गांव में स्थित 100 से अधिक क्रेशर को गत दिनों ज़िला टास्क फोर्स की टीम ने ध्वस्त कर दिया। हिस्से क्रेशर व्यवसायों के साथ साथ हजारों मजदूरों के समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। वहीं बाजार पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
