विष्णुगढ़ से राजेश दुबे की रिपोर्ट
विष्णुगढ़ । विष्णुगढ़ के महंथ अखाड़ा चौक की दुर्गा पूजा सबसे पुरानी है। 153 वर्ष से यहां दुर्गा पूजा का आयोजन जारी है। विष्णुगढ़ के महंथ अखाड़ा चौक में महंथ घराने द्वारा सबसे पहले 1870 में दुर्गा पूजा का आयोजन किया गया था इसके बाद प्रखण्ड के मड़मो में भी दुर्गा पूजा का आयोजन होने लगा, महंथ घराने के मड़मो मौजा के भंडारी गुज्जु सिंह ने मड़मो में दुर्गा पूजा की शुरुआत की गयी थी। महंथ घराने के द्वारा प्रखण्ड के विभिन्न स्थानों में अनेक मंदिरों का समय दर समय निर्माण भी करवाया गया जो की आज भी विभिन्न जगहों के ग्रामीणों के देख रेख में संचालित किया जाता है। महंथ अखाड़ा के दुर्गा पूजा की शुरुआत महंथ घराने के स्वर्गीय राम किशुन दुबे ने की थी। अपने पूर्वजों द्वारा शुरू की गयी पूजा को धरोहर मान कर आज की तारीख में महंथ घराने के द्वारा पारम्परिक तरीके से जारी रखा गया है।
बताया गया कि महंथ वासुदेव दास को उनके बचपन में चेचक हुआ था और इससे उनकी जान पर बन आयी थी। उनके बचाव में उनके पिता राम किशुन दुबे ने माँ दुर्गा से मनौती मांगी थी और महंथ जी की जान बच गयी थी। महंथ वासुदेव दास को चेचक से राहत मिलने की मांगी गयी मनौती पूरी होने पर उनके पिता ने विष्णुगढ़ के महंथ अखाड़ा चौक में दुर्गा पूजा का आयोजन किया जो साल दर साल जारी है। महंथ घराने की आयोजित दुर्गा पूजा के प्रति श्रद्धालुओं की बड़ी श्रद्धा बनी है। महंथ घराने के द्वारा 1870 ई० से पीढ़ी दर पीढ़ी पारम्परिक तरीके से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया जाता है, इस घराने के 10 वीं पीढ़ी के राजेंद्र कुमार दुबे, राम कुमार दुबे, राजेश कुमार दुबे एवं राकेश कुमार दुबे आज के समय में अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहे हैं और पूजा को सम्पन्न कराने कालीचरण पांडे एवं आनंद मिश्र एवं अनिल मिश्र जुटे हैं। महंथ घराने की दुर्गा पूजा का सफल करने में विष्णुगढ़, चेडरा के ग्रामीण एवं दुकानदारों का महत्वपूर्ण योगदान हमेशा रहता है। शनिवार को नवपत्रिका प्रवेश के साथ महाप्तमी पूजन की गई।इसके अलावा सार्वजनिक दुर्गा मंदिर रमुवा,गोविंदपुर,कोनार डैम ,करगालो,गाल्होबार, मडमो एवं नरकी में मा दुर्गे की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जा रही है।
