झरिया । जगत के नाथ भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा मंगलवार को धूमधाम से निकाला गया। नगर का भ्रमण कर भक्तों के साथ भगवान चार नंबर टैक्सी स्टैंड स्थित बनाए गए मौसीबाड़ी पहुंचे। भक्तों ने श्रद्धा की डोर से प्रभु का रथ खींच परिवार और समाज के लिये मंगलकामना की। सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने प्रभु के दर्शन किए। बृज गोपिका मिशन के श्रद्धालु कार्यकर्ताओं ने जय जगन्नाथ प्रभु जय जगन्नाथ…, राधे राधे गोविंद गोविंद राधे राधे…गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो…, भज गोविंदो भज गोपाला… भजनों से गुणगान किया। गाजे-बाजे के साथ भक्ति भजनों पर श्रद्धालु झुमते नाचते चल रहे थे ।

भगवान जगन्नाथ के रथयात्रा के बारे में पूजा समितियों ने बताया कि झरिया निवासी रामखेलावन साव पुत्र रत्न की कामना पूर्ण होने पर 91 वर्ष पूर्व 1932 में पहली बार झरिया में रथ यात्रा की शुरुआत हुई थी। झरिया मेन रोड स्थित पंचदेव मंदिर से मंगलवार को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ रथ यात्रा निकाली गई। भगवान जगन्नाथ की पूजा मंदिर परिसर में की गई। यजमान के रूप में अजय गुप्ता व सूरज गुप्ता सपरिवार बैठे थे। पुरोहित विजय पांडेय द्वारा  विधिवत पूजा अर्चना कराया गया। इसके बाद मंदिर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व माता सुभद्रा को रथ पर बिठाकर पूजा, आरती की गई। रथ के पहिए को घुमाकर यात्रा की रस्म अदायगी की गई। भारी संख्या में महिलाएं , पुरुष व बच्चो ने प्रभु जगन्नाथ, भाई वीर भद्र व बहन सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर नेह की डोर में बंधे रथ को खिंचा। रथ यात्रा की शुरुआत पंच देव मंदिर से निकलकर धर्मशाला रोड, लाल बाजार, लक्षमनिया मोड़ , बाटा मोड़ नगर भर्मण करते हुए चार नंबर टेक्सी स्टैंड पहुंची। जहाँ रथ को तीन दिनों के लिए स्थापित किया गया। वही रथ पूजा को लेकर मेले का भी आयोजन किया गया। तीन दिनों बाद पुन: भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व माता सुभद्रा को उनके मंदिर में स्थापित किया जाएगा। मौके पर राजकुमार अग्रवाल, समिति के संयोजक विष्णु त्रिपाठी, अजय गुप्ता, सूरज गुप्ता, विजय पांडेय, हरीश जोशी, सत्यनारायण भोजगड़िया, दीपू गुप्ता, देव पांडेय,अरिदम बनर्जी, मुक्तेश्वर मिश्रा, मुन्ना पांडेय, संजय केसरी, रामश्रेष्ठ झा, लोकेश गुप्ता, कल्लू गुप्ता, शिवम त्रिपाठी, सदाशिव केसरी, डोल केसरी समेत कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।

पुत्र रत्न की प्राप्ति के लिए रामखेलावन साव ने मांगी थी मन्नत,,,,
झरिया निवासी अजय गुप्ता ने कहा कि मेरे परदादा रामखेलावन साव पुत्र कामना की इच्छा से वर्ष 1930 में भगवान जगन्नाथ के दरबार पूरी पहुंचे थे। भगवान जगन्नाथ के दरबार में माथा टेक कर कहा था कि पुत्र होने पर रथयात्रा निकालूंगा। भगवान जगन्नाथ के आशीर्वाद से रामखेलावन साह को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। इसके बाद हर्ष और आनंद के साथ काठ का भव्य रथ बनवाया और सर्व साधारण की पूजा के लिए समर्पित कर दिया। 1932 में पहली बार झरिया में आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को रथ यात्रा निकली। तब से यह रथ यात्रा झरिया में अनवरत जारी है।

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