धनबाद । देश में चांद का दीदार बीते दिन शुक्रवार को रोजे के आखिरी दिन हो चुका है। ऐसे में आज यानी 22 अप्रैल 2023, शनिवार को ईद मनाई जा रही है। ईद का जश्न कोयलांचल समेत पूरे देश में शुरू हो चुका है।

ईद उल फितर को लेकर धनबाद में अंजुमन इस्लाहुल मुस्लेमिन की तरफ से नमाज के लिए समय सारणी जारी की गई थी। जिसमें धनबाद जिले में 49 स्थानों पर ईद-उल-फितर की नमाज अदा की जानी थी। जिसके तहत धनबाद के रेलवे ग्राउंड, नया बाजार, डीसी कंपाउंड, मनाइटांड़, नूरी मस्जिद सहित विभिन्न ईदगाहों में मुस्लिम समाज के लोगों ने ईद-उल-फितर का नमाज अदा किया। नमाज अदा करने के बाद एक दूसरे को बधाइयां दी। वही मीडिया को बताया कि देश में अमन-चैन, आपसी सौहार्द और एकता के लिए दुआ मांगी गई है। जिससे कि देश तरक्की के मार्ग पर बढ़ सके।
बता दें दसवें महीने शव्वाल के पहले दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है। इस्लामिक कैलेंडर अनुसार सभी महीनों की तरह ही ये महीना भी नए चांद दिखने के साथ शुरू होता है। इस्लामिक मान्यताओं अनुसार मक्का से मोहम्मद पैगंबर के प्रवास के बाद पाक शहर मदीने में ईद-उल-फितर मनाने का उत्सव शुरू हुआ था। धार्मिक मान्यताओं अनुसार ईद का त्योहार पैगम्बर हजरत मुहम्मद द्वारा बद्र की लड़ाई में जीत हासिल करने के बाद मनाया गया था। इस जीत की खुशी में सभी का मुंह मीठा करवाया गया था। इसलिए इस दिन को मीठी ईद के रूप में मनाया जाता है। ईद की शुरुआत में सुबह नए कपड़े पहनकर लोग ईदगाह जाते हैं। जहां सभी लोग एक साथ ईद की नमाज़ अदा करते है।

भारत में रमजान के पाक महीने की शुरुआत 24 मार्च 2023 को हुई थी, जो कि इस्लामिक कैलेंडर का 9वां महीना होता है। इस तरह 29वें रोजे के बाद इस्लामिक चंद्र कैलेंडर के 10वें महीने जिसे शव्वाल कहा गया है, उसके पहले दिन ईद मनाई जाती है।
ईद का महत्व : इस दिन जकात यानी दान का भी काफी महत्व है। कुरान की मानें तो ईद के अवसर पर किसी गरीब व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दान करने से अल्लाह की कृपा सदैव बनी रहती है।
अमन और भाईचारे को बढ़ावा देता है ईद का त्योहार : ईद के अवसर पर लोग नये-नये कपड़े पहनते हैं, आपस में गले मिलकर एक दूसरे को सेवइयां खिलाते हैं और उपहार देते हैं। इस्लाम धर्म का यह त्योहार मूलरूप से अमन और भाईचारे को बढ़ावा देता है तथा अपने मजहब के प्रति समर्पण को दर्शाता है।
ईद-उल-फितर के दिन खाई जाती है मीठी सेवई : मुस्लिम धार्मिक मान्यताओं अनुसार पैगंमबर मुहम्मद साहब ने सन् 624 ईस्वी. में बद्र की लड़ाई में जीत हासिल की थी। कहते हैं इसी जीत की खुशी में उन्होंने ईद-उल-फितर मनाते हुए लोगों का मुंह मीठा किया था। इसलिए मुस्लिम समुदाय के लोग ईद-उल-फितर के दिन मीठी सेवई बनाकर एक-दूसरे को खिलाते हैं।
आपसी भाईचारे को बढ़ावा देता है ईद का त्योहार : ईद-उल-फितर का त्योहार इस्लाम धर्म के लोगों के लिए बेहद खास होता है। ये पर्व रमजान महीने के अंतिम दिन चांद का दीदार करने के बाद मनाया जाता है। जिस दिन चांद के दर्शन होते हैं उसके ठीक अगले दिन यानी शव्वाल महीने के पहले दिन ईद मनाई जाती है। ये त्योहार आपसी भाईचारे को बढ़ावा देता है।

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