कतरास । आदिवासी सेचेद आखड़ा समिति, धनबाद के तत्वावधान में आयोजित संथाल भाषा दिवस परसी माहा हाई स्कूल मैदान राजगंज में मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि झामुमो बाघमारा के पूर्व प्रखंड अध्यक्ष रतिलाल टुडू ने कहा की संथाल भाषा दिवस पर बाघमारा प्रखण्ड के विभिन्न क्षेत्रों से उपस्थित जनजातीय समुदाय के महिला पुरूषों, यूवक यूवतीयों के द्वारा पारम्परिक आदिवासी नृत्य, संगित और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम अपने अतिविशेष परिधान में प्रस्तुत किया जिसमें झारखण्ड की सांस्कृतिक और सभ्यता की झलक स्पष्ट रूप से देखी गई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रतिलाल टुडू ने कहा कि संथाल भाषा दिवस आदिवासी की पहचान है।

आज ही के दिन भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 दिसम्बर 2003 में92वाँ संविधान संशोधन अधिनियम के द्वारा संथाली भाषा को सूचिबद्ध किया गया था।हमारी सभ्यता विरासत से प्राप्त संथाली भाषा को मान सम्मान और सर्वोच्च आदर करते हुए पूर्ण रूप से इसके प्रति जागरूक और अभिप्रेरित होने पर बल दिया।पंडित रघुनाथ मुर्मू ने कहा की संताली भाषा के लिए ओलचिकी लिपि का विकास किया,उन्नीसवीं शताब्दी तक, संताली लोगों के पास कोई लिखित भाषा नहीं थी और हमारा ज्ञान केवल एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक मौखिक रूप से प्रसारित होता था।

उपरोक्त आज के संथाल भाषा दिवस, परसी माहा कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी समुदाय को अपनी भाषा लिपि के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है।दुसरे समुदाय के लोगों के द्वारा हमारी सभ्यता और विरासत को नित्य प्रतिदिन अतिक्रमण करने का जोरदार प्रयास किया जा रहा है इससे हमलोगों को सचेत और सिख लेने की आवश्यकता है और हमें अपने पूर्वजों को सम्मान करते है।बेहतर प्रस्तुति के लिए प्रोत्साहित करते हुए छात्र छात्राओं के बीच पारितोषक वितरण किया गया।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से सनातन सोरेन केंद्रीय अध्यक्ष अनिल टुडू केंद्रीय सचिव (सोनत संथाल समाज ) कालेश्वर किस्कु, प्रमोद हेम्ब्रम, सुमित्रा सोरेन, गीता देवी बेसरा, सुधीर हेम्ब्रम, उपेंद्र मरांडी, अलसा सोरेन, किसुन मरांडी, बिरजू सोरेन, सुरेन्द्र हेम्ब्रम, सुरेन्द्र चौहान, रौनक सिन्हा, सहजाद, जाहिद आदि उपस्थित थे।

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