निशिकान्त मिस्त्री
जामताड़ा । बंगला सावन महीने के अंतिम दिन से शुरु होकर भादो महीना के अंंतिम दिन तक एक महिना जिले के विभिन्न क्षेत्रों के बंगाली बाहुल्य गांवो में विष की देवी मां मनसा की पुजा अर्चना का सिलसिला जारी रहेगा। मान्यता है कि मां मनसा की पुजा करने से याचक और उसका परिवार विष के प्रभाव से मुक्त रहता है। दुसरे शब्दो में विष से आमना- सामना नही होता है। मां मनसा को विषहरी देवी के रूप में जानते है और क्षेत्र के लोग मनसा देवी में अटुट आस्था रखते है। क्षेत्र के हर परिवार के एक सदस्य द्वारा मां मनसा देवी का निर्जला उपवास रहकर पूजा- अर्चना के उपरांत जल ग्रहण करते है।
मासव्यापी चलने वाले पुजन कार्यक्रम के पहले दिन मां मनसा देवी की प्रतिमा स्थापित कर या कलश स्थापन कर पुजा अर्चना धुमधाम से की गयी। मॉ मनसा देवी की स्थायी मंदिर है जहॉ पुरे पारम्परिक रीति रीवाज के साथ पुजा अर्चना की जाती है। इसके अलावे जिन गांवो में मंदिर नही है वहॉ देवी की प्रतिमा या कलश स्थापना कर कठोर उपवास एवं ब्रत के साथ भक्तों द्वारा देवी की अराधना करते है। देवी की पुजा सामिष और आमिष दोनो ही पद्धति से की जाती है। सामिष पुजा करने वाले भक्त जहॉ बगैर पशुबलि दिए ही पुजा करते है। वही आमिष पुजा करने वाले भक्तो द्वारा देवी को बकरा एवं भेड़ की बलि दी जाती है।
बलि के बाद गुरुवार को प्रसाद के रूप में मांस परिजनो और आमंत्रित अतिथियो के बीच वितरित की जाती है। मनसा पुजा के मौके पर प्रखंड के अधिकतर गांवो में धार्मिक कार्यक्रमो का आयोजन भी काफी जोशो खरोस के साथ किया जाता है। वही केवटपाड़ा मेें पूजा के उपलक्ष पर रात को रामायण गान का आयोजन किया जाता है। बहरहाल क्षेत्र में मॉ मनसा पुजा का मासव्यापी आयोजन पुरे धुमधाम से शुरू हो गया। मनसा पूजा को लेकर बुधवार को बाजार और हाट में चहल पहल रहा।
