विश्वजीत चटर्जी

96 सौर प्रकाश इकाइयाँ स्थापित, कुष्ठ कॉलोनी से लेकर 7 गांवों तक पहुंचा उजाला

जोरापोखर। जामाडोबा स्थित डुंगरी नंबर-07, जिसे स्थानीय रूप से कुष्ठ कॉलोनी के नाम से जाना जाता है, अब शाम ढलते ही अंधकार में नहीं डूबती। जहाँ कभी मिट्टी के तेल के दीयों और अनियमित बिजली के सहारे जीवन चलता था, वहाँ अब सौर ऊर्जा से संचालित स्वच्छ और विश्वसनीय रोशनी से घर-आंगन जगमगा रहे हैं।

टाटा स्टील फाउंडेशन ने वंचित समुदायों तक विश्वसनीय ऊर्जा समाधान पहुँचाने की प्रतिबद्धता के तहत जामाडोबा परिचालन क्षेत्र में व्यापक सौर प्रकाश व्यवस्था पहल लागू की है।

डुंगरी नंबर-07 (कुष्ठ कॉलोनी) में 14 सोलर होम लाइटें स्थापित की गईं। इससे जरूरतमंद परिवारों को बिना रुकावट के बिजली मिल रही है।

इसके अलावे कुष्ठ कॉलोनी में 8 सोलर स्ट्रीट लाइटें
लाल बंगला हरिजन टोला में 10 सोलर स्ट्रीट लाइटें भी लगाई गई।

सामुदायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूर्णाडी (12), प्रोजेक्ट ऑफिस के समीप बेलूबाखार (10), बेलूबाखार (17), सुयाकनाली (6), पूर्णाडी आमटोला (4), कुष्टांड (5) तथा अपर डुंगरी बस्ती (10) में कुल 64 स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं।

कुल मिलाकर इस पहल के तहत 96 प्रकाश इकाइयाँ स्थापित की गई हैं, जिससे सैकड़ों लोगों को सुरक्षित, विश्वसनीय और पर्यावरण-अनुकूल प्रकाश व्यवस्था का लाभ मिल रहा है।

इस पहल का असर सिर्फ रोशनी तक सीमित नहीं है। बेहतर रोशनी वाले सार्वजनिक स्थानों से सड़क सुरक्षा बढ़ी है, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा में सुधार हुआ है, शाम के बाद आवाजाही आसान हुई है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता घटी है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब बच्चे शाम को बेहतर माहौल में पढ़ाई कर पा रहे हैं और परिवार पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

टाटा स्टील फाउंडेशन का कहना है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ कर सुरक्षित, समावेशी और सतत समुदायों के निर्माण के प्रति यह उसकी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता है। प्रौद्योगिकी, सस्टेनेबिलिटी और सामुदायिक विकास को जोड़कर फाउंडेशन वंचित समुदायों के जीवन स्तर में सुधार और समावेशी विकास को गति देने के लिए लगातार काम कर रहा है।

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