विश्वजीत चटर्जी
विधायक रागिनी सिंह ने गुणवत्ता पर उठाए सवाल, भारी वाहनों के समय में बदलाव और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
जोरापोखर। जीतपुर-जामाडोबा मुख्य मार्ग पर रविवार शाम करीब 6 बजे फिर से भू-धंसान हो गया। पिछले कार्यकाल में करोड़ों रुपये की लागत से बनी यह सड़क एक साल भी नहीं टिक सकी। घटना से हजारों स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। विधायक रागिनी सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
बताते चलें कि जीतपुर में मुख्य सड़क का एक हिस्सा रविवार को अचानक धंस गया। गनीमत रही कि उस समय कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। यह सड़क डिनोबिली, कार्मेल, डीएवी सहित कई स्कूलों के हजारों छात्रों और आम लोगों के लिए प्रमुख मार्ग है। सड़क धंसने से स्कूली बच्चों, व्यवसायियों और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सूचना मिलते ही झरिया विधायक रागिनी सिंह घटनास्थल पहुंचीं। उन्होंने जिला प्रशासन, टाटा स्टील यूआईएसएल और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ सड़क के नीचे बनी गॉफ का जायजा लिया।
टाटा स्टील यूआईएसएल के अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित स्थल पर लगभग 10 फीट तक चारों ओर बालू भरकर गॉफ भराई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। इसके बाद तकनीकी मानकों के अनुसार सड़क की मरम्मत की जाएगी।
विधायक ने घटनास्थल से ही उपायुक्त आदित्य रंजन से फोन पर बात कर सड़क की शीघ्र मरम्मत, सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
विधायक ने कहा कि जीतपुर से टाटा कंपनी के भारी वाहन दिनभर गुजरते हैं। संवेदनशील क्षेत्र को देखते हुए भारी वाहनों के परिचालन के समय में बदलाव किया जाए ताकि दिन में स्कूली बच्चों और आम लोगों को परेशानी न हो और सड़क पर दबाव कम हो।
रागिनी सिंह ने कहा, यह सड़क पिछले कार्यकाल में बनी थी लेकिन एक वर्ष भी नहीं टिक सकी। इसकी गुणवत्ता की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। दोषी ठेकेदार और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो।
उन्होंने कहा कि झरिया जैसे भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में निर्माण से पहले भू-वैज्ञानिक अध्ययन और बाद में नियमित निगरानी जरूरी है।
लोगों ने कहा कि बार-बार अस्थायी मरम्मत के बजाय स्थायी समाधान किया जाए। क्षेत्र पहले से संवेदनशील है, इसलिए अब सिर्फ आश्वासन नहीं, सुरक्षित और टिकाऊ सड़क चाहिए।
फिलहाल गॉफ भराई का काम जारी है और पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के लिए निगरानी बढ़ा दी है। अब सबकी नजर मरम्मत और स्थायी समाधान पर टिकी है।
