रामावतार स्वर्णकार
हजारीबाग । हजारीबाग के आध्यात्मिक इतिहास में सोमवार को एक नया अध्याय तब जुड़ा जब शहर के हुडहुडू बड़कागांव पथ पर स्थित स्वामी विवेकानंद स्कूल – कॉलेज के मुख्य द्वार पर भगवान श्री रामकृष्ण परमहंस देव जी का मंदिर अस्तित्व में आया। यहां इस मंदिर का उद्घाटन श्री रामकृष्ण मठ एवं मिशन बेलूर के संघ सह अध्यक्ष स्वामी दिव्यानंद जी महाराज ने बिहार- झारखंड के रामकृष्ण विवेकानंद भाव प्रचार परिषद के सभी सदस्य एवं मठ मिशन के लगभग 55 संतों सहित सैकड़ों गणमान्य लोगों की मौजूदगी में विधि विधान से पूजा- अर्चना कर किया। करोड़ों रुपए की लागत से बना यह मंदिर बेलूर मठ रामकृष्ण मठ एवं मिशन के अंतर्राष्ट्रीय हेडक्वाटर बेलूर मठ के आदल से बना है। तकरीबन 4500 स्क्वायर फीट भूखंड में बना यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला, नक्काशी और गर्भगृह के गुंबद के लिए अनोखा है। इस मंदिर के नक्काशी में भारत की विविधता में एकता को प्रदर्शित करता है। इसमें झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, राजस्थान और दक्षिण भारत के कई क्षेत्र के कला-संस्कृति और पुरातन आकृतियों को उकेरा गया है। इस मंदिर के निर्माण में करीब 4 साल का वक्त लगा। मंदिर का निर्माण उड़िया के प्रसिद्ध कारीगर गंगाधर जाना द्वारा आर्किटेक्ट से लेकर निर्माण तक इनके नेतृत्व एवं देखरेख में ही हुआ है। इस मंदिर में भक्तारिणी काली मां के साथ भगवान श्री रामकृष्ण परमहंस देव जी के स्थान मां शारदा, स्वामी विवेकानंद जी की पूजा होगी। यहां से शांत वातावरण में आध्यात्मिकता की अनोखी ऊर्जा प्रज्वलित होगी। स्कूल परिसर में इस मंदिर का निर्माण समाज के भावी पीढ़ी में अपनी संस्कृति और सभ्यता के साथ संस्कार का बोध अध्ययन के साथ हो इसे लेकर किया गया है। स्वामी विवेकानंद स्कूल- कॉलेज शिक्षा के प्रसार के प्राचीन संस्कृति के उत्थान पर भी विशेष ध्यान देती है। इसी कड़ी में हजारीबाग के आमजनों के लिए आध्यात्मिक उन्नति का एक विशेष केंद्र के रूप में इस मंदिर को समाज को समर्पित किया जा रहा है। रामकृष्ण शारदा आश्रम सोसाइटी द्वारा इस मंदिर का संचालन किया जाएगा ।
