निशिकांत मिस्त्री

जामताड़ा । मां चंचला त्रिदिवसीय त्रयोदस वार्षिक महोत्सव 2026 को ऐतिहासिक, भव्य एवं दिव्य स्वरूप प्रदान करने के उद्देश्य से 16 जनवरी को आयोजित होने वाली मां चंचला कलश शोभा यात्रा के अंतर्गत कलश साज-सज्जा को लेकर स्वयंसेवकों एवं महोत्सव समिति के पदाधिकारियों की एक विस्तृत एवं महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि इस वर्ष 40,000 से अधिक कलशों की साज-सज्जा की जाएगी। सभी कलशों को मां चंचला मंदिर परिसर में एकत्रित किया जाएगा, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण, विधि-विधान एवं विशेष पूजा-अर्चना के उपरांत प्रत्येक कलश में पवित्र जल भरा जाएगा। इसके बाद आम पत्र, पुष्प, नारियल एवं पारंपरिक धार्मिक सामग्री से कलशों को सजाकर शोभा यात्रा हेतु तैयार किया जाएगा।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ मार्गदर्शकों एवं अनुभवी सदस्यों ने आयोजन को अनुशासित, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धा-भाव से संपन्न कराने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में महोत्सव समिति के अध्यक्ष श्री वीरेंद्र मंडल उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा की मां चंचला का यह महोत्सव किसी एक व्यक्ति या समिति का नहीं, बल्कि पूरे जामताड़ा वासियों और देश-विदेश में बसे माता के भक्तों की आस्था का प्रतीक है। मां की कृपा से ही हर वर्ष यह आयोजन और अधिक भव्य होता जा रहा है। 40 हजार से अधिक कलशों की साज-सज्जा अपने आप में एक ऐतिहासिक कार्य है। यह तभी संभव है जब सभी स्वयंसेवक इसे सेवा और साधना मानकर करें। मां के कार्य में शुद्धता और पवित्रता सबसे आवश्यक है।”मुझे विश्वास हैं कि प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी सभी कलश साज सज्जा के स्वयं सेवक अपने अपने दायित्व का बखूबी निर्वहन करेंगे।


श्री मंडल ने कलश साज-सज्जा से जुड़े सभी स्वयंसेवकों से महोत्सव अवधि में सात्विक जीवन-शैली अपनाने, लहसुन-प्याज सहित तामसिक भोजन का त्याग करने तथा पूर्ण श्रद्धा और अनुशासन के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का विशेष आग्रह किया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष मां चंचला की कृपा से 16 जनवरी को निकलने वाली कलश शोभा यात्रा राज्य ही नहीं, बल्कि देश स्तर पर एक ऐतिहासिक पहचान बनाएगी। बैठक में प्रमुख रूप से महान अधिवक्ता सह समिति के वरिष्ठ सदस्य मोहन लाल वर्मन जी, लक्ष्मण झा, त्रिलोचन पांडे, वीरेंद्र बाबू, पारसनाथ दुबे, जोगेंद्र पाण्डेय जी सहित अनेक वरिष्ठजन एवं बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मां चंचला त्रिदिवसीय त्रयोदस वार्षिक महोत्सव 2026 को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का संकल्प लिया।

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