धनबाद।धनबाद की गलियों में इन दिनों एक ही नाम चर्चा में है, महापौर प्रत्याशी अमित अग्रवाल। सुबह की चाय की दुकानों से लेकर शाम के व्यस्त बाजारों तक, हर जगह उनके नाम की गूंज सुनाई दे रही है। व्यापारी हों या आम नागरिक, हर वर्ग के लोग उनके साथ कदम मिलाते नजर आ रहे हैं। झरिया, सिंदरी, डिगवाडीह, कतरास, हीरापुर, बैंक मोड़, पुराना बाजार, सरायढेला जहां भी अमित अग्रवाल पहुंचते हैं, वहां स्वागत का माहौल बन जाता है। दुकानदार अपने प्रतिष्ठान से बाहर निकलकर उनका अभिनंदन करते हैं, तो युवा वर्ग सेल्फी लेकर अपने समर्थन का इज़हार करता है। महिलाओं की टोली भी उन्हें सुनने और अपनी समस्याएं बताने के लिए उत्सुक दिखती है।अमित अग्रवाल सिर्फ चुनावी वादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बाजारों की जमीनी समस्याओं जाम, सफाई, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट, सुरक्षा और व्यापारिक सुविधा, को लेकर स्पष्ट दृष्टिकोण रखते हैं। उनका कहना है कि “मजबूत बाजार ही मजबूत शहर की पहचान है।”
व्यापारियों का मानना है कि शहर को ऐसा महापौर चाहिए जो व्यापार को बढ़ावा दे, मूलभूत सुविधाएं दुरुस्त करे और नगर निगम की व्यवस्था को पारदर्शी बनाए। यही वजह है कि बाजारों में उनके समर्थन में चर्चा तेज हो चुकी है।लोगों के बीच उनकी सहजता, सादगी और सक्रियता उन्हें एक अलग पहचान दे रही है। हर मुलाकात में वे समस्याएं सुनते हैं, नोट करते हैं और समाधान का भरोसा देते हैं। यही कारण है कि आम जनता उन्हें सिर्फ एक प्रत्याशी नहीं, बल्कि उम्मीद के रूप में देख रही है।धनबाद की सड़कों पर अब सवाल नहीं, चर्चा है।क्या इस बार शहर की कमान ऐसे चेहरे को मिलेगी जो बाजारों की नब्ज समझता है और जनता की आवाज को अपनी ताकत मानता है?शहर का माहौल बदल रहा है, और बदलाव की इस बयार में अमित अग्रवाल का नाम तेजी से उभर रहा।
