झरिया । ईस्ट भगतडीह कतरास मोड झरिया दुखहरणी मंदिर स्थित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक श्रीमाया मधुसूदन धाम हरिद्वार पीठाधीश्वर स्वामी क्षी बैकुंठनाथ जी महाराज ने शनिवार को अपने प्रवचन मे कहा कि भागवत में 28 प्रकार के नरक का वर्णन है। नरक से बचने का सबसे सरल मार्ग भगवान का नाम जप है। उदाहरणस्वरूप, अजामिल जैसे पापी भी जीवन के अंतिम क्षण में भगवान का नाम लेकर परम धाम प्राप्त कर लिया। इसी प्रकार, वृत्रासुर राक्षस होने के बावजूद इन्द्र के वज्र से मृत्यु के समय भगवान का स्मरण कर उन्हें दर्शन हुआ। और उन्होंने श्लोकों में भगवान की स्तुति की।उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास जी के रामचरितमानस में कलियुग की महिमा का बखान करते हुए कहा कि“कलियुग केवल नाम अधारा।”
अर्थात कलियुग में केवल भगवान का नाम ही एकमात्र सहारा है।महाराज ने प्रह्लाद चरित्र का प्रसंग सुनाया।कहा कि प्रह्लाद मृत्यु के निकट होने तथा राक्षसों के बीच रहने के बावजूद भगवान की भक्ति नहीं त्यागी। इस चरित्र से सीख मिलती है कि मनुष्य कितनी भी विषम परिस्थितियों में हो, भगवान की भक्ति कभी नहीं छोड़नी चाहिए। भक्त प्रह्लाद को दर्शन देने के लिए श्री हरि ने नरसिंह अवतार लिया था।कार्यक्रम में आचार्य संजीव दुबे के द्वारा वेदी पूजन कराया गया तथा मां दुखहरणी का भावपूर्ण पूजन संपन्न किया ।देर शाम झरिया विधायक रागिनी सिंह दुखहरणी मंदिर पहुंची।उन्होंने मां दुखहरणी के चोखट पर माथा टेका।वहीं आचार्य बैकुंठ से मिलकर आशिर्वाद ली।मौके पर अध्यक्ष राज नारायण तिवारी, सचिव बासुदेव सोनी, पिंकू चौबे, अजय श्रीवास्तव ,संजू सिंह, विकास प्रसाद, मंटू यादव जितेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह, बबलू दुबे, राजेश रवानी रवि रवानी,पवन सिंह,

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