बालू उठाव से बदल रही है नदियों की प्रकृति, होगा बड़ा नुकसान
रामावतार स्वर्णकार
इचाक । पर्यावरण संरक्षण को लेकर झारखंड सरकार के खनन विभाग द्वारा बालू खनन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद थाना क्षेत्र में बालू माफियाओं का हौसला बढ़ता जा रहा है। इन दिनों थाना क्षेत्र के सिवाने नदी से बालू माफियाओं द्वारा बालू का उत्खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है, और प्रशाशन मुकदर्शक बनी हुई है। जानकारी के अनुसार नदियों से बालू के उत्खनन का कार्य देर रात से लेकर सुबह 7:00 बजे तक जारी रहता है। जिसमें दर्जनों ट्रेक्टर और जेसीबी मशीन लगे रहते हैं।
बालू माफिया सेवाने नदी के लेदाही, पुंडरी अलौंजा खुर्द, सदर थाना क्षेत्र के डंडई, दारु थाना क्षेत्र के कनौदी और मेढ़कुरी सिमाना से बालू उठाकर इचाक, दारु, टाटी झरिया और सदर थाना क्षेत्र के विभिन्न गांवों में महंगे दामों पर बेचते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बालू का गोरखधंधा संबंधित थाना क्षेत्र के पुलिस कर्मियों के साथ गांठ से चलती है। इन बालू माफियाओं से पुलिस मासिक वसूली करती है। और अपना औपचारिकता पूरा करने के लिए कभी कभार नदियों की तरफ पेट्रोलिंग करने आ जाती है।
क्या होता है नुकसान
बालू के अत्यधिक उठाव से नदियों की प्रकृति बदल गई है। नदियों में जहां तहां कुआंनुमा बड़े बड़े गड्ढे बन गए हैं। नदियों में स्थित पत्थर और बड़े बड़े चट्टानो को भी माफियाओं ने ध्वस्त कर दिया। ये चट्टान और पत्थर जल प्रवाह की गति को कम करते हैं, जिसके करण भूमि अपरदन में कमी आती है, और नदियों के किनारे का कटाव अपेक्षाकृत काफ़ी कम होता है। और पत्थर के थपेड़ों से पानी साफ और निर्मल होता है। बहरहाल चंद स्वार्थ के कारण नदियों की प्रकृति बदलने से आने वाले दिनों में मनुष्य के लिए खतरा ही उत्पन्न होगा।
क्या कहते हैं थाना प्रभारी
इस बाबत पूछे जाने पर प्रशिक्षु आईपीएस सह इचाक थाना प्रभारी ऋषभ गर्ग ने बताया कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसी बात है तो माइनिंग इंस्पेक्टर को सूचना दें। कार्रवाई में थाना से टीम भी जायेगी।
