हाल इचाक के डाडी घाघर पंचायत का

प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को मिला खाट का सहारा

हजारीबाग/इचाक। प्रखंड मुख्यालय से लगभग 17 किमी दूर सुदुरवर्ती डाडीघाघर पंचायत के पुरनपनिया गांव में दो दिनों से प्रसव पीड़ा से कराहती निशा कुमारी (20) पति प्रकाश मुर्मू को अंततः खाट का ही सहारा मिला। उसे ईलाज के लिए गांव के लोगों ने पारंपरिक खाट पर लेटा कर लगभग चार किमी दूर फुफंदी गांव लाए जहां से एंबुलेंस के सहारे उसे इचाक समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लाया गया। जहां उसका सुरक्षित प्रसव कराया गया। निशा कुमारी पिछ्ले दो दिनों से प्रसव पीड़ा से कराह रही थी। लेकिन घर पर या आसपास को पुरुष सदस्य नहीं होने के कारण उसे ईलाज के लिए बाहर नही ले जाया जा सका था। पुरंपनिया गांव घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ी के बीच बसा है। संथाल बहुल इस गांव के 50 घरों में लगभग 300 की आबादी निवास करती है। गांव से फुफंदी गांव तक पगडंडियों के सहारे आना जाना पड़ता है। सड़क नहीं होने के कारण चार पहिया वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य समस्या आने पर यहां के लोग चारपाई या बहंगी में बैठाकर मरीज को इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र ले जाते हैं।

आजादी के 77 वर्ष बाद भी पंचायत में मूलभूत सुविधाओं का है घोर अभाव

समाजसेवी रमेश कुमार हेंब्रम ने बताया कि दाढ़ीघाघर पंचायत के सुदुरवर्ती सिमरातरी, पुरंपनियां, गर्डीह, सालुजाम जैसे कई गांव अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव में सड़क, चिकित्सा और उच्च शिक्षा के साधन नहीं। रोजगार भी नहीं।अधिकतर लोग मजदूरी पर आश्रित है। गांव के ज्यादातर युवा रोजगार के लिए पलायन कर गए हैं। उच्च विद्यालय के अभाव में अधिकतर बच्चे पढ़ नहीं पाते। और खेती मजदूरी में लग जाते हैं। मेडिकल इमरजेंसी में यहां के लोगों का खाट या बहंगी ही सहारा बनता है।

क्या कहते हैं मुखिया

मुखिया नंद किशोर मेहता ने बताया कि अथक प्रयास के बाद डीएमएफटी फंड से फुफंदी से पुरंपनिया तक लगभग चार किमी पीसीसी पथ का टेंडर पास हुआ है। लेकिन वन विभाग की उदासीन रवैए के कारण निर्माण कार्य लंबित है। वन विभाग का नियम और शर्ते वहां के लोगों के लिए काला कानून से कम नहीं। दुसरी ओर वन क्षेत्र में बसने वाले ग्रामीणों की समस्याओं से वन विभाग के अधिकारियों का कोई लेना देना नहीं है। अगर वन विभाग एनओसी जारी कर दे तो ग्रामीणों को अच्छी सड़क का सौगात मिलेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *