धनबाद । कोयलांचल में महासप्तमी पर शनिवार को कोलाबोउ का गाजे-बाजे व ढोल-नगाड़े के साथ पूजा पंडालों में प्रवेश कराया गया। बंगाली परंपरा के अनुसार भक्त सप्तमी की सुबह धूमधाम से नवपत्रिका लेकर आसपास के नदी तालाब व सरोवरे में गई। वापसी में कोलबोउ को डोली में बैठकर लाया गया। नवपत्रिका और कोलाबोउ का पंडाल में प्रवेश कराया गया। विधि विधान से पूजा अर्चना की गई। इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ पुजारी मां दुर्गा की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा किया। झरिया सा नंबर सेक्सी स्टैंड श्री श्री श्री मामला चंडी पूजा सेवा समिति सदस्यों द्वारा शनिवार की सुबह विधि विधान के साथ पारंपरिक तरीके महिलाएं, बच्चे व बड़े सभी झूमते व नृत्य करते हुए राजा तालाब पहुंचे और धनबाद जिला परिषद के बंगाली कल्याण समिति के सदस्यों ने भी सुबह पारंपरिक परिधान में महिला, पुरुष, बच्चे नृत्य कर तालाब पहुंचे। जिसके बाद कोलाबोउ को डोली पर लाई गई।

बंगाली परंपरा के अनुसार कोलाबोउ की आराधना का विशेष महत्व है। शारदीय नवरात्र के षष्ठी पूजन पर माता दुर्गा अपने नौ स्वरूपों में जगत कल्याण के लिए पृथ्वी पर आती हैं। भगवान गणेश की पत्नी कोलाबोउ की आराधना कर मां दुर्गा की आराधना शुरू होती है। विधि विधान से कलश स्थापन किया जाता है। इसके बाद लाल कपड़े में कोलाबोउ को केले के पेड़ को लपेटकर पूजा-अर्चना की जाएगी। इससे पूर्व षष्ठी तिथि की गोधूलि बेला में श्रद्धालुओं ने नवपत्रिका का आह्वान किया।

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