गुस्साये लोगों ने डेढ़ घंटे जाम किया सड़क
हाइवा परिचालन पर रोक, सीसीटीवी फुटेज की जांच और मुआवजे की मांग पर अड़े रहे लोग
झरिया । झरिया थाना क्षेत्र के कतरास मोड़ सिंह नगर के समीप शुक्रवार को अज्ञात हाइवा की चपेट में आने से नारायण ठाकुर (60) की दर्दनाक मौत हो गई । मृतक नारायण ठाकुर झरिया के मानबाद के रहने वाले थे और ऊपर राजबाड़ी में सैलून चलाते थे । घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने झरिया-केंदुआडीह मार्ग को जाम कर दिया। लोग इस मार्ग पर हाइवा परिचालन पर रोक लगाने, सीसीटीवी फुटेज खंगालकर दुर्घटना में शामिल हाइवा की पहचान करने और मृतक के स्वजनों को उचित मुआवजा देने की मांग कर रहे थे।सूचना मिलने पर सिंदरी डीएसपी प्रकाश चंद्र महतो, झरिया सीओ मनोज कुमार और झरिया इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार पांडे पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंचे। झरिया विधायक रागिनी सिंह और मेयर संजीव सिंह भी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि, आक्रोशित लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे।बताया जाता है कि राजबाड़ी में दुर्गापूजा की प्रतिमा विसर्जन में नारायण अपने तीनों पुत्रों विनय, सोनू और मोनू के साथ शामिल हुआ था। विसर्जन जुलूस सिंहनगर स्थित छठ तालाब पहुंचा। प्रतिमा विसर्जन में देर होने के कारण नारायण अकेले ही घर लौटने लगा। इसी दौरान सिंहनगर मार्ग पर एक हाइवा उसे अपनी चपेट में लेते हुए फरार हो गया। हादसे में उसकी मौत हो गई।घटना के बाद पत्नी मीना ठाकुर और तीनों पुत्रों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लिए यह हादसा गहरा दुख लेकर आया है। वहीं, स्थानीय लोगों ने बताया कि इस मार्ग पर हाइवा की चपेट में आने से अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसके बावजूद भारी वाहनों के परिचालन पर रोक नहीं लगाई गई है। लोगों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए मार्ग पर हाइवा परिचालन बंद करने और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर वाहन की पहचान करने की मांग की।प्रशासनिक अधिकारियों, विधायक और मेयर के समझाने के बावजूद लोग काफी देर तक सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए। इस कारण झरिया-केंदुआडीह मार्ग पर आवागमन प्रभावित रहा।
हादसे के कारण डेढ़ घंटे देर से हुआ प्रतिमा विसर्जन
नारायण की मौत की खबर फैलते ही प्रतिमा विसर्जन में शामिल लोग भी सड़क पर उतर आए। विसर्जन के बजाय लोग विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो गए, जिससे प्रतिमा विसर्जन का कार्यक्रम रुक गया। बाद में प्रशासन के समझाने पर लोग तैयार हुए और प्रतिमा विसर्जन किया गया। हादसे के कारण विसर्जन कार्यक्रम करीब डेढ़ घंटे विलंब से पूरा हुआ।
