अभिषेक मिश्रा
चासनाला । चासनाला स्थित न्यू मोती नगर में पिछले दो-तीन माह से तीन घरों में लगातार दरार पड़ने और गैस रिसाव की घटना से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है। दीपक दत्ता, सावित्री देवी और सीताराम दास के घरों में दरारें आने के साथ जमीन से गैस निकलने की शिकायत सामने आई है। घर की स्थिति को देखते हुए परिवार के लोग अपने ही मकान में रहने से डर रहे हैं। सुरक्षा के लिहाज से कुछ लोग किराये के दूसरे मकान में रहने को मजबूर हैं, जबकि कुछ परिवारों ने अपने सदस्यों को मायके भेज दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घरों में जिस तरह से दरारें बढ़ रही हैं, उससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। परिवारों के बीच इस बात को लेकर भय बना हुआ है कि पता नहीं घर आज गिरेगा, कल गिरेगा या अचानक कब धराशायी हो जाएगा। रात के समय परिवार के लोग विशेष रूप से भयभीत रहते हैं।
विस्थापित होकर बनाए थे आशियाने, अब फिर मंडरा रहा खतरा।
बताया जाता है कि प्रभावित परिवार पहले पुराने मोती नगर में रहते थे। विस्थापन के बाद उन्हें न्यू मोती नगर में बसाया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि विस्थापन के बाद उन्हें सुरक्षित आवास मिलेगा, लेकिन अब उन्हीं घरों में दरार और गैस रिसाव की समस्या सामने आने से परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके के नीचे जमीन में आग लगी हुई है। इसी कारण जमीन के अंदर से गैस निकलने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, गैस रिसाव और जमीन में आग लगने के कारणों की तकनीकी जांच अभी आवश्यक है।
सेल महाप्रबंधक और विधायक को दी शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार।
प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों ने मामले की शिकायत चासनाला सेल के महाप्रबंधक से की है। इसके अलावा झरिया विधायक को भी समस्या से अवगत कराया गया है। लोगों का कहना है कि शिकायत के बावजूद अब तक समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
प्रभावित परिवारों ने मांग की है कि सेल प्रबंधन तत्काल विशेषज्ञों की टीम भेजकर घरों और जमीन की जांच कराए। गैस रिसाव के स्रोत का पता लगाने के साथ यह भी जांच हो कि मकानों में आई दरार कितनी गंभीर है और वहां रहना सुरक्षित है या नहीं।
लोगों की मांग है—पहले सुरक्षा, फिर समाधान।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मामला केवल मकानों में आई दरार तक सीमित नहीं है। यदि वास्तव में जमीन के नीचे आग या गैस का रिसाव है, तो यह आसपास रहने वाले अन्य परिवारों के लिए भी खतरा बन सकता है। इसलिए प्रशासन और सेल प्रबंधन को किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना तत्काल स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक सुरक्षा उपाय करने चाहिए।
प्रभावित परिवारों का कहना है कि उन्होंने विस्थापन के बाद बड़ी उम्मीद से यहां अपना घर बसाया था, लेकिन अब अपने ही घर में रहने से डर लग रहा है। परिवारों ने सेल प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों से जल्द कार्रवाई कर सुरक्षित आवास अथवा उचित समाधान उपलब्ध कराने की मांग की है।
